Himachal News: हिमाचल प्रदेश में निर्मित दवाओं के सैंपल पिछले एक साल यानी अप्रैल 2025 से अप्रैल 2026 के दौरान लगातार गुणवत्ता परीक्षण में फेल हो रहे हैं। सीडीएससीओ की मासिक रिपोर्ट्स बताती हैं कि नवंबर 2025 में 49 सैंपल, दिसंबर में 50 सैंपल और जनवरी 2026 में 71 सैंपल घटिया पाए गए। इनमें बुखार, हार्ट अटैक, डायबिटीज, एपिलेप्सी और ब्लड प्रेशर की दवाएं शामिल हैं। राज्य औषधि नियंत्रक ने कंपनियों को स्टॉक वापस बुलाने का आदेश दिया है। यह स्थिति मरीजों के इलाज को सीधे प्रभावित कर रही है।
सीडीएससीओ अलर्ट में हिमाचल का बड़ा हिस्सा
हिमाचल प्रदेश देश का प्रमुख दवा उत्पादक राज्य है। यहां 664 से ज्यादा फार्मास्यूटिकल यूनिट काम करती हैं। फिर भी सीडीएससीओ की जांच में हिमाचल के सैंपल राष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा फेल हो रहे हैं। बद्दी-बारोटीवाला-नालागढ़ और सिरमौर के काला अंब व पावंटा साहिब क्षेत्र सबसे प्रभावित रहे। कंपनियां हर महीने नोटिस प्राप्त कर रही हैं। राज्य प्रशासन सैंपलिंग बढ़ा रहा है लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
पिछले साल फेल हुए सैंपलों का आंकड़ा
अप्रैल 2025 से अप्रैल 2026 तक सीडीएससीओ ने कई बार ड्रग अलर्ट जारी किए। नवंबर 2025 में 49 सैंपल फेल हुए। दिसंबर 2025 में यह संख्या 50 पहुंच गई। जनवरी 2026 में 71 सैंपल घटिया पाए गए। फरवरी में भी इसी तरह के आंकड़े सामने आए। कुल मिलाकर हिमाचल राष्ट्रीय फेल सैंपलों का 30 प्रतिशत से ज्यादा योगदान दे रहा है। हर महीने कंपनियों को स्टॉक रिकॉल का निर्देश मिल रहा है।
किन दवाओं के सैंपल फेल हुए
फेल सैंपलों में रोजमर्रा की कई दवाएं शामिल हैं। कफ सिरप, एंटीबायोटिक्स और इंजेक्शन सबसे ज्यादा फेल हुए। हाई ब्लड प्रेशर की टेल्मिसार्टन गोलीयां, हार्ट अटैक की दवाएं और डायबिटीज की दवाएं भी गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं। बुखार की दवाएं, एपिलेप्सी की दवाएं, अस्थमा की दवाएं और किडनी संबंधी दवाएं भी सूची में हैं। कुछ सस्पेंशन और लोकल एनेस्थेटिक इंजेक्शन भी फेल पाए गए।
किन बीमारियों की दवाएं प्रभावित
इन फेल दवाओं से कई गंभीर बीमारियां प्रभावित हुई हैं। हार्ट अटैक और ब्लड प्रेशर के मरीजों की दवाएं सबसे ज्यादा चिंता का विषय बनीं। डायबिटीज के मरीजों को भी घटिया दवाएं मिल रही हैं। बुखार और एपिलेप्सी की दवाएं असरदार साबित नहीं हो रही हैं। संक्रमण के इलाज वाली एंटीबायोटिक्स और कफ सिरप भी फेल हो चुके हैं। किडनी और अस्थमा की दवाएं मरीजों के स्वास्थ्य को और जोखिम में डाल रही हैं।
लोगों के लिए कितना घातक है यह मुद्दा
घटिया दवाएं मरीजों के लिए सीधा खतरा पैदा करती हैं। सक्रिय तत्व कम होने से इलाज असफल हो जाता है। हार्ट या डायबिटीज के मरीजों में स्थिति बिगड़ सकती है। इससे अस्पताल में भर्ती या मौत का खतरा बढ़ जाता है। गलत फॉर्मूला से साइड इफेक्ट पैदा होता है। एंटीबायोटिक्स फेल होने से दवा प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। लंबे समय में यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है।
सरकार और नियंत्रक की कार्रवाई
हिमाचल के औषधि नियंत्रक मनीष कपूर ने फेल कंपनियों को तुरंत नोटिस जारी किए। उन्होंने बाजार से स्टॉक वापस लेने के सख्त निर्देश दिए। राज्य सरकार ने सैंपलिंग और जांच बढ़ा दी है। फिर भी मासिक अलर्ट जारी हो रहे हैं। विशेषज्ञ गुणवत्ता नियंत्रण को और मजबूत बनाने की सलाह दे रहे हैं। मरीजों को डॉक्टर की सलाह पर ही दवा लेने की अपील की जा रही है।
