एम्स में 84 करोड़ का पेमेंट फंसा, रोने लगे मरीज! जानिए कैसे जुगाड़ पर चल रहा सबसे बड़ा अस्पताल

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के एम्स बिलासपुर में स्वास्थ्य सेवाएं अब भारी संकट में फंस गई हैं। राज्य सरकार ने आयुष्मान योजना के पचपन करोड़ और हिमकेयर के उनतीस करोड़ रुपये का भुगतान रोक दिया है। इस बड़े बकाये के कारण अस्पताल का सिस्टम चरमराने लगा है। मरीजों को जरूरी इलाज नहीं मिल रहा है। प्रबंधन सरकार से पैसों की गुहार लगा रहा है। जल्द फंड नहीं मिलने पर सेवाएं पूरी तरह ठप हो जाएंगी।

बड़ी और महंगी सर्जरी पर लगा ब्रेक

एम्स में फंड की कमी से जटिल सर्जरी बहुत प्रभावित हुई हैं। हिप और घुटना रिप्लेसमेंट जैसे बड़े ऑपरेशन अब नियमित रूप से नहीं हो रहे हैं। इन ऑपरेशनों में महंगे इम्प्लांट और विशेष उपकरणों की काफी जरूरत होती है। डॉक्टर मरीजों को जांच के बाद सर्जरी के लिए लंबा इंतजार करवा रहे हैं। ये महंगे ऑपरेशन आयुष्मान और हिमकेयर योजना में मुफ्त होते हैं। जरूरी उपकरणों की कमी से ऑपरेशनों की रफ्तार धीमी पड़ी है।

जुगाड़ के भरोसे चल रहा एम्स का सिस्टम

अस्पताल की सामान्य और छोटी सर्जरी अभी भी किसी तरह चल रही हैं। आपातकालीन मामलों में भी मरीजों के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। प्रबंधन अलग-अलग वेंडरों से जुगाड़ करके सामान की आपूर्ति करवा रहा है। इसी कारण अस्पताल की व्यवस्था अभी पूरी तरह से नहीं टूटी है। कुछ पुराने वेंडर अब भी थोड़ा सहयोग कर रहे हैं। एम्स प्रशासन उपलब्ध सीमित संसाधनों से काम चला रहा है। लंबित भुगतान अस्पताल पर भारी दबाव डाल रहा है।

वेंडरों ने रोकी सप्लाई, मरीजों का दर्द बढ़ा

सरकार से पैसा नहीं मिलने से कई वेंडरों ने सामान की सप्लाई घटा दी है। बड़ी सर्जरी के लिए जरूरी इम्प्लांट और उपकरणों की भारी किल्लत हो गई है। वेंडरों का सीमित सहयोग लंबे समय तक चलना बहुत मुश्किल है। इस गंभीर स्थिति का बुरा असर गरीब कार्ड धारकों पर पड़ रहा है। ऑपरेशनों के टलने से मरीजों का दर्द लगातार बढ़ रहा है। निजी अस्पतालों में महंगा इलाज करवाना आम लोगों के लिए संभव नहीं है।

तत्काल भुगतान नहीं हुआ तो रुकेगा पूरा सिस्टम

मरीज अनिश्चितता के बीच अस्पताल में लंबा इंतजार करने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार स्थिति को तुरंत संभालना बहुत जरूरी है। सरकार को पेंडिंग भुगतान का तत्काल निपटान करके वेंडरों का विश्वास जीतना होगा। अस्पताल में दवाओं और उपकरणों की सप्लाई सुनिश्चित करना वक्त की मांग है। फिलहाल एम्स में जैसे-तैसे कुछ इलाज चल रहा है। अगर सरकार ने जल्दी पैसा नहीं दिया, तो एम्स की स्वास्थ्य सेवाएं जल्द ही पूरी तरह ठप हो जाएंगी।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
/ month
placeholder text

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories