World News: मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के बीच इजरायल को यूरोप से बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने एक बेहद सख्त फैसला लिया है। उनकी सरकार ने इजरायल के साथ मौजूदा रक्षा समझौते को तत्काल रोक दिया है। अब इस समझौते का ऑटो-रिन्यूअल बिल्कुल नहीं होगा। रोम का यह अहम कदम लेबनान में इजरायली सेना की बढ़ती सैन्य कार्रवाइयों के बाद उठाया गया है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर इजरायल के लिए यह बहुत बड़ी कूटनीतिक रुकावट मानी जा रही है।
पीएम मेलोनी ने रक्षा सहयोग पर उठाया सख्त कदम
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने वेरोना में एक वाइन मेले के दौरान यह बड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि मध्य-पूर्व के मौजूदा तनाव को देखते हुए यह फैसला जरूरी था। इटली सरकार अब इजरायल के साथ सैन्य सहयोग को आगे नहीं बढ़ाएगी। इस खास समझौते के तहत दोनों देश सैन्य उपकरणों और तकनीकी अनुसंधान का लेन-देन करते थे। रिन्यूअल रुकने का सीधा मतलब है कि तय समय के बाद यह सैन्य समझौता पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
शांति सैनिकों पर इजरायली हमले से इटली हुआ नाराज
इटली और इजरायल के बीच आई इस कड़वाहट की एक बड़ी वजह है। लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के इतालवी शांति सैनिक तैनात हैं। पिछले सप्ताह इजरायली सेना ने इन सैनिकों के एक काफिले पर गोलियां चला दी थीं। इजरायल ने इसे केवल एक चेतावनी बताया था। इस गोलीबारी में इटली का एक सैन्य वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इटली सरकार ने इस घटना को गंभीरता से लिया और तुरंत इजरायली राजदूत को तलब कर लिया।
नागरिकों पर इजरायली हमलों को बताया पूरी तरह अस्वीकार्य
इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने इजरायल को कड़ी चेतावनी दी है। अपनी बेरूत यात्रा में उन्होंने लेबनान के बड़े नेताओं से मुलाकात की। ताजानी ने लेबनान में आम नागरिकों पर हो रहे इजरायली हमलों को एकदम अस्वीकार्य बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी अपनी गहरी चिंता जाहिर की। ताजानी ने लिखा कि मध्य-पूर्व में गाजा जैसी भीषण हिंसा को हर हाल में रोकना होगा। उन्होंने इलाके में तत्काल और स्थायी संघर्ष-विराम की जोरदार मांग की है।
यूरोपीय देशों के बदलते रुख से इजरायल की बढ़ी चिंता
इटली का यह कड़ा फैसला इजरायल के लिए एक बहुत बड़ा सामरिक नुकसान है। यह कदम यूरोपीय देशों के इजरायल के प्रति बदलते नजरिए को भी साफ दर्शाता है। विदेश मंत्री ताजानी ने दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण बातचीत को सबसे जरूरी बताया है। इटली हमेशा से युद्ध की जगह शांतिपूर्ण कूटनीतिक समाधान का प्रबल समर्थक रहा है। अब देखना होगा कि इटली की इस सख्ती का इजरायल और यूरोप के संबंधों पर क्या असर पड़ता है।
