डोनाल्ड ट्रंप को नोबल पदक देने वाली कोरिना मचाडो ने किया बड़ा खुलासा, क्या अब शांत होगी ट्रंप की ‘पुरस्कार’ की भूख?

USA News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नोबेल शांति पुरस्कार के प्रति उनका विशेष लगाव एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गया है। वेनेजुएला की दिग्गज नेता प्रतिपक्ष और वर्ष 2025 की नोबेल पुरस्कार विजेता कोरिना मचाडो ने अपना आधिकारिक नोबेल पदक राष्ट्रपति ट्रंप को सौंप दिया है। मैड्रिड में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान मचाडो ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए ट्रंप की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ट्रंप एक ऐसे साहसी नेता हैं, जिन्होंने वेनेजुएला की मुक्ति के लिए अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा को भी दांव पर लगा दिया था।

मचाडो का बयान: ‘ट्रंप ने वेनेजुएला को दी स्वतंत्रता’

एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरिना मचाडो ने मैड्रिड सम्मेलन में भावुक होते हुए कहा कि वेनेजुएला को निकोलस मादुरो के शासन से आजादी दिलाने में ट्रंप की भूमिका निर्णायक रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें अपना नोबेल पदक ट्रंप को देने पर कोई पछतावा नहीं है। मचाडो के अनुसार, मादुरो के खिलाफ चलाया गया अमेरिकी अभियान एक ऐसी ऐतिहासिक घटना है, जिसे वेनेजुएलावासी कभी नहीं भुला पाएंगे। इस कूटनीतिक और सैन्य दबाव ने वेनेजुएला में लोकतंत्र की नई उम्मीद जगाई है, जिसके लिए वे ट्रंप की आभारी हैं।

नोबेल के लिए ट्रंप का लंबा इंतजार और विवाद

डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से नोबेल शांति पुरस्कार की सार्वजनिक तौर पर मांग कर रहे थे। उन्होंने दावा किया था कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने विश्व भर में करीब सात संभावित युद्धों को रुकवाने में सफलता हासिल की है। हालांकि, नॉर्वे की नोबेल समिति ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए ट्रंप के नामांकन पर विचार करने से इनकार कर दिया था। समिति ने इसके बजाय वेनेजुएला में अत्याचारों के खिलाफ संघर्ष करने वाली कोरिना मचाडो को इस सम्मान का हकदार चुना। इस फैसले से नाराज होकर ट्रंप ने नोबेल समिति और नॉर्वे सरकार की कड़ी आलोचना भी की थी।

व्हाइट हाउस में मुलाकात और पदक का हस्तांतरण

शुरुआत में ट्रंप और मचाडो के रिश्तों में कुछ कड़वाहट देखी गई थी, खासकर तब जब ट्रंप ने मचाडो के वेनेजुएला में जनाधार को लेकर सवाल उठाए थे। जानकारों का मानना है कि ट्रंप मचाडो से इसलिए नाराज थे क्योंकि उन्होंने शुरुआत में पदक अपने पास ही रखा था। इसके बाद कूटनीतिक दूरियां कम करने के उद्देश्य से कोरिना मचाडो ने व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात की। इस विशेष बैठक के दौरान उन्होंने अपना नोबेल पदक राष्ट्रपति को भेंट कर दिया। ट्रंप ने इस पदक को सहर्ष स्वीकार कर लिया है, जिससे उनके समर्थकों में उत्साह है।

नोबेल समिति की स्पष्ट चेतावनी और नियम

पदक हस्तांतरण की खबरों के बीच नॉर्वे की नोबेल समिति ने एक कड़ा आधिकारिक बयान जारी किया है। समिति ने स्पष्ट किया है कि पदक का भौतिक कब्जा चाहे किसी के भी पास हो, लेकिन पुरस्कार का दर्जा और ओहदा हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। नोबेल पुरस्कार के नियमों के अनुसार, यह सम्मान न तो किसी दूसरे को दिया जा सकता है और न ही इसे किसी के साथ साझा किया जा सकता है। समिति के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि भले ही ट्रंप के पास अब पदक है, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड में विजेता मचाडो ही रहेंगी।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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