West Bengal News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मचे घमासान के बीच ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) से मिली हार को ममता ने ‘भीतरघात’ का परिणाम बताया है। बुधवार को कालीघाट स्थित अपने आवास पर नवनिर्वाचित विधायकों के साथ बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के अंदरूनी लोगों ने ही संगठन को नुकसान पहुंचाया है। ममता ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि नेतृत्व के खिलाफ किसी भी तरह का असंतोष अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भीतरघात की जांच के लिए अनुशासन समिति और फैक्ट-फाइंडिंग टीम गठित
ममता बनर्जी ने चुनाव में मिली हार के कारणों की तह तक जाने के लिए एक उच्चस्तरीय अनुशासन समिति का गठन किया है। इस समिति में डेरेक ओ’ब्रायन, फिरहाद हकीम, चंद्रिमा भट्टाचार्य और असीमा पात्रा जैसे दिग्गज नेताओं को शामिल किया गया है। यह टीम उन सभी शिकायतों की जांच करेगी जिसमें पार्टी पदाधिकारियों द्वारा चुनाव के दौरान असहयोग या विश्वासघात के आरोप लगे हैं। इसके अतिरिक्त, हिंसा प्रभावित जिलों और खराब प्रदर्शन वाले क्षेत्रों की समीक्षा के लिए तीन अलग-अलग फैक्ट-फाइंडिंग टीमों को भी तैनात किया गया है।
इस्तीफे से इनकार और विधानसभा में ‘ब्लैक ड्रेस’ प्रोटेस्ट का आह्वान
चुनाव परिणामों को ‘धांधली’ करार देते हुए ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि वे चुनाव प्रक्रिया के खिलाफ अपना विरोध जारी रखेंगी और अगर सरकार उन्हें हटाना चाहती है तो बर्खास्त कर दे। ममता ने 9 मई को विधानसभा के पहले दिन सभी टीएमसी विधायकों को काले कपड़े पहनकर आने का निर्देश दिया है, ताकि इस दिन को ‘काला दिवस’ के रूप में दर्ज किया जा सके। उन्होंने दावा किया कि वोट शेयर में मात्र 30 लाख का अंतर है, जो संदिग्ध तरीके से हटाए गए नामों के बराबर है।
विपक्षी दलों पर हमला और भविष्य की कानूनी लड़ाई का संकेत
बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने विपक्षी दलों पर राज्य भर में टीएमसी के 1,500 से अधिक कार्यालयों को नुकसान पहुंचाने और प्रतिमाएं खंडित करने का आरोप लगाया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे 9 मई को रवींद्र जयंती को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाएं, जिस दिन नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह प्रस्तावित है। ममता ने यह भी संकेत दिया कि वे जल्द ही वकालत के पेशे में वापस लौट सकती हैं। साथ ही, चुनाव परिणामों में कथित धांधली के खिलाफ उनकी पार्टी अदालत और अंतरराष्ट्रीय मंचों का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही है।


