Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची स्थित सदर अस्पताल में एक मरीज की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुढ़मू निवासी संतोष कुमार की मौत के बाद उनके परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही बरतने का सीधा आरोप लगाया है। परिजनों का दावा है कि संतोष पेट दर्द की शिकायत के बाद खुद कार चलाकर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन वहां बिना गहन जांच के इंजेक्शन देने के कुछ ही देर बाद उनकी जान चली गई।
इंजेक्शन के बाद बिगड़ी स्थिति और अस्पताल में बढ़ा तनाव
मृतक के परिजनों ने बताया कि अस्पताल पहुंचने पर संतोष पूरी तरह होश में थे और उन्होंने खुद गाड़ी पार्क की थी। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने बिना किसी प्राथमिक जांच या रिपोर्ट के उन्हें इंजेक्शन दे दिया। इंजेक्शन लगने के तुरंत बाद संतोष को तेज घबराहट और बेचैनी होने लगी और देखते ही देखते उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सिविल सर्जन ने दी सफाई और अस्पताल प्रबंधन का पक्ष
मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची के सिविल सर्जन प्रभात कुमार ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मरीज जब अस्पताल आया था, तब उसकी स्थिति पहले से ही काफी नाजुक थी। डॉक्टरों ने प्रोटोकॉल के तहत उसे गैस और प्रारंभिक उपचार की दवाएं दी थीं, लेकिन स्थिति बिगड़ने के कारण उसे बचाया नहीं जा सका। अस्पताल प्रबंधन ने सहानुभूति जताते हुए गुरुवार सुबह निशुल्क एम्बुलेंस के जरिए शव को पैतृक आवास भेजने की व्यवस्था करने की बात कही है।
पुलिस की जांच और स्वास्थ्य सेवाओं पर उठते गंभीर सवाल
घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और आक्रोशित भीड़ को समझा-बुझाकर शांत कराया। फिलहाल पुलिस ने मामले की जानकारी जुटाकर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की आपातकालीन सेवाओं और इलाज की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या बिना डायग्नोसिस के इंजेक्शन देना चिकित्सा मानकों का उल्लंघन नहीं है? फिलहाल परिजन इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।


