झारखंड: रेलवे स्टेशन निर्माण की आड़ में मिट्टी और पत्थर का बड़ा अवैध खनन, प्रशासन ने दर्ज की FIR

Jharkhand News: झारखंड के टंडवा थाना क्षेत्र में रेलवे लाइन बेड और फुलवारिया स्टेशन निर्माण के नाम पर बड़े पैमाने पर अवैध खनन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्रामीणों की निरंतर शिकायतों के बाद हुई आधिकारिक जांच में 11 एकड़ गैरमजरूआ खास भूमि सहित रैयती जमीनों से अवैध रूप से मिट्टी और पत्थर निकालने की पुष्टि हुई है। उपायुक्त रवि आनंद के कड़े निर्देश पर इस मामले में टंडवा थाना में नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस कार्रवाई के बाद निर्माण कार्य में लगी संवेदक कंपनियों और बिचौलियों के बीच हड़कंप मच गया है।

राजस्व टीम की जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

मीडिया में खबरें आने के बाद उपायुक्त ने राजस्व टीम को 30 अप्रैल को फुलवारिया और गोविंदपुर गांवों में जांच के लिए भेजा था। जांच के दौरान पाया गया कि फुलवारिया के खाता संख्या 142 में लगभग 7.98 एकड़ सरकारी भूमि पर अवैध रूप से उत्खनन किया गया है। वहीं गोविंदपुर गांव में करीब तीन एकड़ भूमि से 14 फीट गहराई तक मिट्टी काटी गई है। कुछ स्थानों पर तो खनन की गहराई 32 फीट तक पाई गई है, जिसने इलाके के भौगोलिक स्वरूप को पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है।

संवेदक कंपनियों पर गिरी गाज, काम रोकने के निर्देश

प्रशासनिक जांच के बाद इस मामले में संलिप्त रेलवे संवेदक कंपनियों—एरोकॉन, मिलिनियम, झांझरिया और रायल को तत्काल प्रभाव से अवैध खनन रोकने का सख्त निर्देश दिया गया है। उल्लेखनीय है कि इसी तरह के मामलों में पहले भी राजा कंस्ट्रक्शन कंपनी पर करोड़ों रुपये का जुर्माना लगाकर उसे ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। बावजूद इसके, अन्य कंपनियों द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाना स्थानीय प्रशासन की निगरानी पर सवालिया निशान खड़ा करता है। फिलहाल पुलिस दर्ज प्राथमिकी के आधार पर दोषियों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया में जुट गई है।

किसानों की भूमि बर्बाद और केढ़नी नदी के अस्तित्व पर संकट

मिश्रोल पंचायत के मुखिया सुवेश राम ने आरोप लगाया है कि अवैध खनन के कारण केढ़नी नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। रैयती जमीनों पर तय सीमा से कई गुना अधिक खुदाई किए जाने से किसानों की उपजाऊ भूमि अब खेती और मकान निर्माण के लिए पूरी तरह अनुपयोगी हो चुकी है। भूदान में मिली दलित परिवारों की जमीन पर भारी पत्थर छोड़ दिए गए हैं, जिससे गरीबों का जीवनयापन संकट में है। स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों पर न केवल जुर्माना लगे, बल्कि प्रभावितों को उचित मुआवजा भी मिले।

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