तमिलनाडु में सियासी भूचाल: कांग्रेस ने द्रमुक से तोड़ा 11 साल पुराना नाता, विजय की टीवीके को दिया समर्थन

Tamil Nadu News: तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार को एक ऐतिहासिक मोड़ आया जब कांग्रेस ने द्रमुक (DMK) के साथ अपना 11 साल पुराना गठबंधन आधिकारिक तौर पर तोड़ दिया। विधानसभा चुनाव में हार के बाद उपजे असंतोष के बीच कांग्रेस ने अब अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके (TVK) का हाथ थाम लिया है। एआईसीसी प्रभारी गिरीश चोडनकर ने टीवीके प्रमुख सी. जोसेफ विजय से मुलाकात कर अपने पांच विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा।

नया राजनीतिक समीकरण और भविष्य की रणनीति

कांग्रेस और टीवीके का यह नया गठबंधन केवल मौजूदा सरकार बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। गिरीश चोडनकर ने स्पष्ट किया कि यह साझेदारी आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों में भी जारी रहेगी। कांग्रेस ने इस बड़े बदलाव को सांप्रदायिक ताकतों को सत्ता से दूर रखने की एक रणनीतिक कोशिश बताया है। इस फैसले ने राज्य के राजनीतिक मानचित्र को पूरी तरह बदल दिया है और विपक्षी एकता के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

द्रमुक ने बताया विश्वासघात, कांग्रेस का पलटवार

द्रमुक नेतृत्व ने कांग्रेस के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘पीठ में छुरा घोंपना’ करार दिया है। द्रमुक नेताओं का कहना है कि संकट के समय सहयोगी का साथ छोड़ना राजनीतिक नैतिकता के खिलाफ है। वहीं, एआईसीसी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए 2013 की याद दिलाई जब द्रमुक ने कांग्रेस का साथ छोड़ा था। उन्होंने कहा कि समान विचारधारा वाली पार्टियों का साथ आना लोकतंत्र में बुराई को रोकने की एक सामान्य प्रक्रिया है।

INDI गठबंधन की एकजुटता पर मंडराया संकट

हालिया विधानसभा चुनावों में द्रमुक और तृणमूल कांग्रेस की हार ने गठबंधन की नींव कमजोर कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह रवैया 2029 में भाजपा के खिलाफ एकजुट मोर्चे को नुकसान पहुँचा सकता है। क्षेत्रीय दलों में यह डर बैठ गया है कि कांग्रेस अपने चुनावी फायदे के लिए सहयोगियों के हितों की बलि दे सकती है। हालांकि, राहुल गांधी ने स्टालिन और विजय दोनों से संपर्क साधकर संतुलन बनाने की कोशिश की है।

तमिलनाडु की सत्ता के आंकड़ों का नया गणित

इस समय तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए जरूरी जादुई आंकड़े को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन मिलने के बाद टीवीके की स्थिति मजबूत हुई है, लेकिन बहुमत का रास्ता अब भी चुनौतीपूर्ण है। सु. थिरुनावुक्करासर ने कहा कि पार्टी की प्राथमिकता फिलहाल राज्य में एक स्थिर सरकार सुनिश्चित करना है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि सत्ता के गलियारों में दोस्त और दुश्मन वक्त के साथ बदलते रहते हैं।

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