Chandigarh News: जबलपुर के बांध में हाल ही में हुए क्रूज हादसे से सबक लेने के बजाय चंडीगढ़ की लाइफलाइन कही जाने वाली सुखना लेक में सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी की जा रही है। लेक पर रोजाना सैकड़ों पर्यटक बोटिंग का आनंद लेते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर प्रशासन और संचालक गंभीर नजर नहीं आ रहे। विशेष रूप से क्रूज की सवारी करने वाले पर्यटकों को लाइफ जैकेट तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। संचालकों का तर्क है कि क्रूज में इसकी आवश्यकता नहीं है, जबकि जबलपुर का हादसा यह सिद्ध कर चुका है कि पानी में अनहोनी कभी भी हो सकती है।
बोटिंग में लापरवाही: लाइफ जैकेट पहनने का तरीका भी नहीं पता
सुखना लेक पर बोटिंग करने वाले पर्यटकों के लिए लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य तो है, लेकिन इसे सही तरीके से पहनने के लिए कोई मार्गदर्शन उपलब्ध नहीं है। मौके पर देखा गया कि कई पर्यटक जैकेट को उल्टा पहनकर ही पानी में उतर रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि लाइफ जैकेट को सीधा पहनने और उसके स्ट्रैप्स को मजबूती से लॉक करने पर ही यह व्यक्ति को पानी में डूबने से बचा सकती है। कई लोग बोटिंग के दौरान जैकेट के बटन खोल देते हैं या उसे उतारकर बगल में रख देते हैं, जिसे रोकने वाला वहां कोई सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं है।
बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़: नहीं हैं पर्याप्त छोटी जैकेट
लेक पर सबसे भयावह स्थिति बच्चों की सुरक्षा को लेकर देखी जा रही है। संचालकों के पास बच्चों के आकार की पर्याप्त लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं हैं। मजबूरन अभिभावक बच्चों को बड़ों की जैकेट पहना रहे हैं, जो उनके शरीर पर इतनी ढीली होती है कि पानी में गिरने की स्थिति में वह तुरंत शरीर से बाहर निकल सकती है। जबलपुर हादसे में मां-बेटे की हृदय विदारक मौत की घटना अभी भी लोगों के जेहन में ताजा है, जहां बच्चे के पास सुरक्षा जैकेट न होने के कारण दोनों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
सुरक्षा से ज्यादा टिकट और कमाई पर संचालकों का ध्यान
बोटिंग पॉइंट पर तैनात कर्मचारी और संचालक केवल टिकट काटने और पर्यटकों की भीड़ को संभालने में व्यस्त नजर आते हैं। टिकट की बिक्री और कमाई पर जितना ध्यान दिया जा रहा है, उतना पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर नहीं है। लाइफ जैकेट पहनाने और उनकी बारीकी से जांच करने की प्रक्रिया महज एक ‘खानापूर्ति’ बनकर रह गई है। सुरक्षा मानकों की इस तरह की खुली अवहेलना किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल हस्तक्षेप कर सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करे ताकि पर्यटकों की जान जोखिम में न पड़े।


