Chandigarh News: चंडीगढ़ के डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड की तस्वीर बदलने के लिए प्रशासन ने एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। यहाँ स्थापित होने वाले सेग्रीगेटेड ऑर्गेनिक म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट (SOMSW) आधारित कॉम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट में प्रतिदिन 200 टन गीले कचरे को प्रोसेस किया जाएगा। इस प्रक्रिया के माध्यम से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) रोजाना आठ टन यानी 8000 किलोग्राम बायोगैस का उत्पादन करेगी। यह प्रोजेक्ट न केवल कचरे की समस्या का समाधान करेगा, बल्कि शहर को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगा।
प्रति माह सवा दो करोड़ रुपये की गैस का होगा उत्पादन
इस प्लांट से उत्पादित होने वाली सीबीजी (CBG) की कीमत बाजार में प्रचलित सीएनजी के दरों के बराबर रहने की संभावना है। वर्तमान में चंडीगढ़ में सीएनजी की कीमत 91 रुपये प्रति किलोग्राम है, जिसके आधार पर आईओसीएल प्रतिदिन लगभग 7.28 लाख रुपये की गैस बेच सकेगी। मासिक आधार पर देखा जाए तो इस प्लांट से करीब 2.25 करोड़ रुपये मूल्य की बायोगैस तैयार होगी। आईओसीएल ने इस पूरे प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली है, जिस पर जल्द ही केंद्र सरकार और नगर निगम के अधिकारियों के बीच उच्च स्तरीय चर्चा होनी है।
आईओसीएल वहन करेगी 125 करोड़ रुपये का पूरा खर्च
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि नगर निगम को इस पर कोई वित्तीय बोझ नहीं उठाना होगा। आईओसीएल लगभग 125 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इस प्लांट को अपने खर्च पर स्थापित कर रही है। कचरा प्रोसेस करने के बाद तैयार होने वाली गैस को बेचकर कंपनी अपनी लागत वसूल करेगी। इसके लिए डंपिंग ग्राउंड के पास ही एक रिटेल आउटलेट भी स्थापित किया जाएगा, जहाँ से आम वाहनों के साथ-साथ नगर निगम के कचरा एकत्र करने वाले वाहन भी ईंधन भरवा सकेंगे। इससे निगम के ईंधन खर्च में भी बड़ी बचत होने की उम्मीद है।
डंपिंग साइट का 33 प्रतिशत हिस्सा होगा ग्रीन कवर
डड्डूमाजरा की प्रस्तावित डंपिंग साइट को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए विशेष डिजाइन तैयार किया गया है। कुल 45 एकड़ की इस जमीन पर अब केवल कचरे के पहाड़ नहीं दिखेंगे, बल्कि इसके 14 एकड़ हिस्से को ‘ग्रीन एरिया’ के रूप में विकसित किया जाएगा। यह हरियाली पट्टी डड्डूमाजरा की आबादी वाली दिशा में होगी, ताकि स्थानीय निवासियों को प्रदूषण से राहत मिल सके। बायोगैस प्लांट के लिए 10 एकड़ भूमि आवंटित की गई है, जबकि भविष्य में विस्तार के लिए 5 एकड़ जमीन सुरक्षित रखी गई है।
दिसंबर 2028 तक प्लांट शुरू करने का लक्ष्य
प्रोजेक्ट की समयसीमा (Timeline) को लेकर भी स्पष्ट खाका तैयार किया गया है। योजना के अनुसार, 20 नवंबर 2025 को एमओयू साइन किया जाएगा और जनवरी 2026 तक जमीन का चिन्हांकन पूरा होगा। निर्माण कार्य 1 अप्रैल 2027 से शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे 31 दिसंबर 2028 तक पूरी तरह चालू कर दिया जाएगा। इस प्लांट के शुरू होने से पटियाला की राव नदी के पास के क्षेत्र में स्वच्छता बढ़ेगी और शहर के कचरा प्रबंधन को एक नई और आधुनिक दिशा मिलेगी।


