यूपी के खूंखार माफिया राज और गैंगवार पर शालीन भनोट का बड़ा खुलासा, बताया 90 के दशक का वो डरावना सच

Uttar Pradesh News: वेब सीरीज ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ को लेकर चर्चा में आए अभिनेता शालीन भनोट ने 80 और 90 के दशक की कानून व्यवस्था पर अपनी बेबाक राय रखी है। शालीन ने बताया कि उस दौर के उत्तर प्रदेश में पुलिस को बेहद चुनौतीपूर्ण और हिंसक हालातों के बीच काम करना पड़ता था। उनके अनुसार, आज के समय में शहरी सुरक्षा पहले के मुकाबले काफी मजबूत हुई है। अब समाज में डर का माहौल कम हुआ है और लोग खुद को अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं।

खूंखार अपराधियों और गैंगवार के साये में पुलिस का संघर्ष

शालीन भनोट ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि उस दौर में अपराधी कानून से बिल्कुल नहीं डरते थे। अपराध खुलेआम होते थे और पुलिस के पास अपराधियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक या पर्याप्त संसाधन मौजूद नहीं थे। इसके बावजूद पुलिस अधिकारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर गैंगस्टरों का सामना किया। यह सीरीज मनोरंजन के साथ-साथ पुलिस बल के उसी कठिन संघर्ष और बलिदान की असली दास्तां को दर्शकों के सामने पेश करने की एक छोटी सी कोशिश है।

महिलाओं की सुरक्षा और समाज में आया बड़ा बदलाव

अभिनेता ने खासतौर पर महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सकारात्मक बदलाव की सराहना की। शालीन के मुताबिक, पहले की तुलना में अब महिलाएं अधिक आत्मविश्वास के साथ घरों से बाहर निकलती हैं। अपराध के मामलों में गिरावट आने से सामाजिक परिवेश में सुधार हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज हम जिस सुरक्षित वातावरण में सांस ले रहे हैं, उसके पीछे सुरक्षा बलों की दशकों की कड़ी मेहनत और अपराधियों के गिरोहों के खिलाफ उनका निरंतर संघर्ष ही मुख्य कारण रहा है।

तकनीक के अभाव में भी पुलिस ने लड़ी बहादुरी की जंग

‘इंस्पेक्टर अविनाश’ की कहानी को लेकर शालीन ने बताया कि यह सीरीज सिर्फ पुलिसिंग की सच्चाई दिखाती है। आज के दर्शकों को लग सकता है कि उस समय पुलिस का काम आसान था, लेकिन असल में ऐसा नहीं था। उस दौर में निगरानी प्रणाली और आधुनिक हथियारों का भारी अभाव था। पुलिस अधिकारियों को अपराधियों के खतरनाक गिरोहों के साथ सीधे टकराव का सामना करना पड़ता था। सीरीज के जरिए उस अव्यवस्थित माहौल और पुलिस की साहसी भूमिका को दिखाने का प्रयास किया गया है।

पुलिस अधिकारियों के बलिदान को समर्पित है यह सीरीज

शालीन भनोट ने अंत में कहा कि यह सीरीज उन जांबाज पुलिस अधिकारियों को समर्पित है, जिन्होंने उत्तर प्रदेश में शांति बहाल करने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया। अपराधियों और पुलिस के बीच होने वाले सीधे टकराव उस समय की कड़वी सच्चाई थे। शालीन का मानना है कि इस तरह की कहानियां समाज को सुरक्षा बलों के प्रति अधिक संवेदनशील और जागरूक बनाती हैं। यह सीरीज उस कालखंड की एक प्रामाणिक तस्वीर पेश करती है जब गैंगवार अपने चरम पर हुआ करता था।

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