Uttar Pradesh News: स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देने वाली खबर है। अब रीचार्ज खत्म होने और निगेटिव बैलेंस 200 रुपये तक पहुंचने पर भी सात दिनों तक बिजली नहीं कटेगी। यूपी पावर कॉरपोरेशन ने 25 अप्रैल से यह नई गाइडलाइंस लागू कर दी हैं। हालांकि, यह सुविधा दो किलोवाट के घरेलू उपभोक्ताओं को ही दी गई है।
इमरजेंसी क्रेडिट पीरियड की नई व्यवस्था लागू
यूपी पावर कॉरपोरेशन ने 25 अप्रैल से इमरजेंसी क्रेडिट पीरियड व्यवस्था शुरू कर दी है। केस्को प्रबंधन ने भी इसे तुरंत लागू कर दिया। केस्को मीडिया प्रभारी देवेंद्र वर्मा ने बताया कि घरेलू स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए तीन श्रेणियां बनाई गई हैं। हर श्रेणी को अलग-अलग राहत अवधि दी गई है। इससे उपभोक्ताओं को अचानक बिजली कटने की परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी।
नई गाइडलाइंस के तहत दो किलोवाट के घरेलू उपभोक्ताओं को विशेष सुविधा मिली है। इनका रीचार्ज खत्म होने पर निगेटिव बैलेंस 200 रुपये तक होने पर सात दिनों तक बिजली नहीं कटेगी। लेकिन 200 रुपये से अधिक बैलेंस होने पर सात दिन से पहले भी बिजली स्वत: कट जाएगी। यह नियम सावधानीपूर्वक समझना जरूरी है।
एक किलोवाट उपभोक्ताओं को मिलेगी 30 दिन की मोहलत
तीन श्रेणियों में सबसे अधिक राहत एक किलोवाट के प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को दी गई है। इनका रीचार्ज खत्म होने और निगेटिव बैलेंस होने के बावजूद 30 दिनों तक बिजली नहीं काटी जाएगी। यह सुविधा गरीब और कमजोर वर्ग के परिवारों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी। उन्हें बिल जमा करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।
वहीं तीसरी श्रेणी में एक किलोवाट से ऊपर लोड वाले सभी कनेक्शनधारकों को शामिल किया गया है। इस वर्ग के उपभोक्ताओं का रीचार्ज खत्म होने पर कम से कम तीन दिनों तक बिजली नहीं कटेगी। यह मोहलत पहले से मौजूद थी और अब भी जारी रहेगी। नई व्यवस्था ने सभी उपभोक्ताओं को कुछ न कुछ राहत जरूर प्रदान की है।
नए कनेक्शन प्रीपेड मोड में देने का विवाद जारी
दूसरी ओर, नए बिजली कनेक्शनों को प्रीपेड मोड में ही देने का विवाद अभी सुलझा नहीं है। यह मामला अब उम्मीद है कि नियामक आयोग में ही सुलझेगा। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने एक अप्रैल को अधिसूचना जारी कर प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त कर दी थी। इसके 26 दिन बीत जाने के बाद भी यूपी में लगातार प्रीपेड कनेक्शन ही दिए जा रहे हैं।
पावर कॉरपोरेशन ने बीते साल सितंबर में आदेश जारी किया था। इसके तहत सभी नए कनेक्शन प्रीपेड मोड में ही दिए जाने थे। उपभोक्ताओं से कोई सहमति नहीं ली जा रही है। जबकि विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) स्पष्ट कहती है कि कनेक्शन का मोड उपभोक्ता तय करेगा। यह अधिकार बिजली कंपनियों को नहीं दिया गया है। इसी धारा के अनुरूप सीईए ने नई अधिसूचना जारी की थी। पावर कॉरपोरेशन को अपना पुराना आदेश वापस लेना चाहिए था। हालांकि, अब तक ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है। उपभोक्ता संगठन इसे कानून का खुला उल्लंघन बता रहे हैं। अब सबकी निगाहें नियामक आयोग के फैसले पर टिकी हैं।
