ममता बनर्जी की बढ़ी मुश्किलें! चुनाव से पहले जातिसूचक टिप्पणी मामले में कड़ा एक्शन, क्या जाएगी कुर्सी?

West Bengal News: चुनावी गहमागहमी के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नई मुसीबत में घिर गई हैं। एक जनसभा में कथित तौर पर जातिसूचक टिप्पणी करने के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इस गंभीर मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री को नोटिस भेजा है। इसके साथ ही राज्य प्रशासन से महज तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब तलब किया गया है।

वीडियो वायरल होने के बाद मचा भारी बवाल

एक प्रमुख बंगाली समाचार चैनल पर प्रसारित वीडियो क्लिप ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस क्लिप में मुख्यमंत्री पर अनुसूचित जाति के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगा है। वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर न्यूज़ रूम तक तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्षी दलों ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया है। भारतीय जनता पार्टी लगातार इस बयान की कड़ी निंदा कर रही है।

आयोग ने मुख्य सचिव और डीजीपी को दिया कड़ा निर्देश

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की निदेशक सोनाली दत्ता ने रविवार को कड़ा कदम उठाया। उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला और पुलिस महानिदेशक सिद्ध नाथ गुप्ता को सीधा पत्र लिखा है। आयोग संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर रहा है। अधिकारियों को तीन दिन के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश मिला है। समय पर जवाब नहीं मिलने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

दूसरे चरण के मतदान से पहले टीएमसी की चुनौती

यह पूरा विवाद बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले खड़ा हुआ है। राज्य में उनतीस अप्रैल को कोलकाता समेत छह जिलों की 142 सीटों पर वोटिंग होनी है। बंगाल में अनुसूचित जाति का एक बहुत बड़ा और निर्णायक वोट बैंक मौजूद है। चुनाव से ऐन पहले आया आयोग का यह नोटिस तृणमूल कांग्रेस को भारी पड़ सकता है। इससे पार्टी के चुनावी समीकरण बिगड़ने की पूरी संभावना नजर आ रही है।

दोषी पाए जाने पर हो सकती है सख्त सजा

अगर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर लगे आरोप सही साबित होते हैं तो मुश्किलें काफी बढ़ जाएंगी। एससी/एसटी एक्ट 1989 के तहत ऐसे मामलों में कानून बेहद सख्त है। सार्वजनिक स्थान पर जातिसूचक गाली देने पर छह महीने से पांच साल तक की सजा का प्रावधान है। गंभीर मामलों में उम्रकैद तक हो सकती है। इस कानून के तहत अग्रिम जमानत आसानी से नहीं मिलती। गिरफ्तारी के बाद ही अदालत से रेगुलर बेल की उम्मीद की जा सकती है।

बीजेपी ने मांगा इस्तीफा, टीएमसी ने किया बचाव

भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे मामले को लेकर ममता बनर्जी पर तीखा राजनीतिक हमला किया है। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री समाज को बांटने वाली राजनीति कर रही हैं। पार्टी ने ममता बनर्जी से तुरंत सार्वजनिक माफी मांगने की कड़ी मांग की है। दूसरी तरफ टीएमसी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सत्तारूढ़ पार्टी का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक फायदे के लिए वीडियो से छेड़छाड़ कर रहा है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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