Himachal News: केंद्र सरकार के समान महंगाई भत्ता देने की मांग पर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर स्पष्ट जवाब मांगा है। राज्य के कर्मचारी लंबे समय से केंद्र के बराबर डीए की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में राज्य और केंद्र के भत्ते में पंद्रह प्रतिशत का बड़ा अंतर है। इस कारण कर्मचारियों को हर महीने भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है।
याचिकाकर्ता ने बताई पदोन्नति और भत्ते की पूरी कहानी
न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की अदालत ने अहम याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। शिक्षा विभाग के एक कर्मचारी ने यह याचिका दायर की है। प्रार्थी अट्ठाईस जनवरी उन्नीस सौ अट्ठानवे को लिपिक के पद पर भर्ती हुआ था। जुलाई दो हजार आठ में उसे वरिष्ठ सहायक बनाया गया। जुलाई दो हजार चौदह में वह सुपरिटेंडेंट ग्रेड-दो बना। उसने अपनी याचिका में भत्ते के आंकड़ों का विस्तृत विवरण दिया है।
राज्य में डीए बढ़ने का गणित और मौजूदा स्थिति
याचिकाकर्ता के अनुसार राज्य में महंगाई भत्ते को कई चरणों में बढ़ाया गया। नौ फरवरी दो हजार बाईस को यह इकतीस प्रतिशत हुआ। सत्ताईस अप्रैल दो हजार तेईस को इसे चौंतीस प्रतिशत किया गया। दो मार्च दो हजार चौबीस को अड़तीस और सोलह अक्टूबर दो हजार चौबीस को बयालीस प्रतिशत हुआ। पंद्रह अक्टूबर दो हजार पच्चीस को इसे पैंतालीस प्रतिशत किया गया। सरकार यह पैंतालीस प्रतिशत भत्ता एक जुलाई दो हजार तेईस से लागू मानकर दे रही है।
हर महीने दस हजार का नुकसान, चार जून को अगली सुनवाई
वर्तमान में केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को साठ प्रतिशत के हिसाब से महंगाई भत्ता दे रही है। वहीं हिमाचल के कर्मचारियों को सिर्फ पैंतालीस प्रतिशत भत्ता मिल रहा है। दोनों के बीच सीधे पंद्रह प्रतिशत का बड़ा अंतर है। इस अंतर के कारण प्रार्थी को हर महीने लगभग दस हजार रुपये का भारी नुकसान हो रहा है। उसने कोर्ट से केंद्र के बराबर भत्ता दिलाने की गुहार लगाई है। मामले की अगली सुनवाई अब चार जून को होगी।


