हिमाचल पंचायत चुनाव: इन सरकारी कर्मचारियों का कटा पत्ता, जमीन पर कब्जा करने वालों के लिए भी दरवाजे बंद

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर राज्य सरकार ने पात्रता के नियम पूरी तरह साफ कर दिए हैं। पंचायती राज अधिनियम के तहत नई अधिसूचना जारी हो गई है। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि चुनाव में कौन उम्मीदवार बन सकता है और किसे बाहर रखा गया है। कई नए वर्गों के लिए पंचायत चुनाव के दरवाजे खोल दिए गए हैं। वहीं कुछ कर्मचारियों और सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों को तगड़ा झटका लगा है।

इन श्रेणियों के लोगों को मिली चुनाव लड़ने की खुली छूट

राज्य सरकार के नए नियमों से कई वर्गों को बड़ी राहत मिली है। अब आउटसोर्स कर्मचारी और डिपो होल्डर पंचायत चुनाव में बेझिझक हिस्सा ले सकते हैं। कृषक मित्र, होम गार्ड और लंबरदार को भी चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह पात्र मान लिया गया है। वनाधिकार कानून के तहत जमीन नियमितीकरण का आवेदन करने वाले लोग भी चुनाव लड़ सकेंगे। सरकार ने इन सभी श्रेणियों के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने का रास्ता बिल्कुल साफ कर दिया है।

आंगनवाड़ी और मिड-डे मील वर्कर चुनाव प्रक्रिया से हुए बाहर

जहां कुछ लोगों को छूट मिली है, वहीं कई कर्मचारियों को अयोग्य घोषित कर दिया गया है। पंचायत चुनाव में आंगनवाड़ी वर्कर और हेल्पर अब अपनी किस्मत नहीं आजमा सकेंगे। स्कूलों में काम करने वाले मिड-डे मील वर्कर और वाटर कैरियर भी इस बार चुनाव नहीं लड़ सकते। सहकारी समितियों के सेल्समैन और सचिव को भी चुनावी प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है। सरकार ने इन पदों की जिम्मेदारियों को देखते हुए यह सख्त फैसला लागू किया है।

सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों पर कसा गया कानूनी शिकंजा

जमीन से जुड़े मामलों में सरकार ने नियम बेहद सख्त कर दिए हैं। जिन लोगों ने सरकारी जमीन पर कब्जा करके नियमितीकरण का आवेदन किया है, वे चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। जिनके खिलाफ नाजायज कब्जे का मामला दर्ज है, उन्हें भी अयोग्य माना गया है। अगर कोई व्यक्ति अपना अतिक्रमण हटा भी लेता है, तो भी वह अगले छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकेगा। हालांकि वनाधिकार कानून के आवेदकों को इस पाबंदी से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

मई में तीन चरणों में होंगे चुनाव, सात से शुरू होगा नामांकन

हिमाचल प्रदेश में इस बार पंचायत चुनाव कुल तीन चरणों में पूरे करवाए जाएंगे। राज्य की तीन हजार सात सौ चौवन ग्राम पंचायतों में छब्बीस, अट्ठाईस और तीस मई को भारी मतदान होगा। चुनाव आयोग ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। उम्मीदवार सात मई से अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। आशा वर्कर के चुनाव लड़ने पर अभी स्थिति साफ नहीं है। जल्द ही सरकार इस पर भी अपना अंतिम और स्पष्ट निर्णय जनता के सामने रखने वाली है।

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