Haryana News: क्या सपनों की भी कोई एक्सपायरी डेट होती है? कुरुक्षेत्र की 47 वर्षीय पम्मी कुंडू इस धारणा को पूरी तरह नकारती हैं। साल 1996 में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने वाली पम्मी आज 2026 में एक बार फिर नीट यूजी (NEET UG) की परीक्षा दे रही हैं। उम्र के इस पड़ाव पर, जहां लोग सेवानिवृत्ति की योजना बनाते हैं, पम्मी अपने ‘सफेद कोट’ पहनने के अधूरे सपने को हकीकत में बदलने के लिए कड़ा संघर्ष कर रही हैं।
पारिवारिक जिम्मेदारियों और जज्बे के बीच का संघर्ष
पम्मी कुंडू का जीवन किसी कठिन फिल्म की पटकथा जैसा रहा है। पिछले दो दशकों से वे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग में सरकारी नौकरी कर रही हैं। लेकिन घर पर चुनौतियां और भी बड़ी थीं। उनके पति पिछले 20 सालों से गंभीर रूप से बीमार हैं और याददाश्त खो चुके हैं। घर की पूरी जिम्मेदारी, नौकरी और बच्चों की परवरिश के बीच पम्मी ने कभी अपने भीतर की छात्रा को मरने नहीं दिया और अपनी पढ़ाई जारी रखी।
1996 की वो टीस जो आज भी दिल में जिंदा है
पम्मी ने फेसबुक पर अपनी भावुक कहानी साझा करते हुए बताया कि 1996 में उन्होंने बीडीएस और बीएएमएस की परीक्षा पहले ही प्रयास में पास कर ली थी। उनका चयन प्रतिष्ठित जामिया हमदर्द और मणिपाल जैसे संस्थानों में एमबीबीएस के लिए भी हुआ था। हालांकि, उस समय सामाजिक बंदिशों और माता-पिता के डर की वजह से वे घर से दूर नहीं जा सकीं। उन्होंने भारी मन से बी-फार्मा तो किया, लेकिन एमआईएमएस (AIIMS) पहुंचने की जिद उनके दिल से नहीं निकली।
बेटी की सफलता ने जगाई उम्मीद की नई किरण
पम्मी कुंडू की जिंदगी में बड़ा बदलाव 2023 में आया जब उनकी बेटी ने पहले ही प्रयास में मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। बेटी को डॉक्टर बनते देख पम्मी को अहसास हुआ कि वे भी अपना अधूरा सफर पूरा कर सकती हैं। बेटी की किताबों ने उनके पुराने अरमानों को फिर से हवा दी। इसके बाद उन्होंने 2024 और 2025 में नीट परीक्षा उत्तीर्ण भी की, लेकिन उनका एकमात्र लक्ष्य देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान एम्स में दाखिला लेना है।
3 मई 2026: एक ऐतिहासिक और भावनात्मक सफर
आज 3 मई 2026 को नीट यूजी परीक्षा के दौरान पम्मी एक नई ऊर्जा के साथ परीक्षा केंद्र पहुंचीं। उनकी बेटी ने भी उन्हें मेसेज कर हौसला बढ़ाया। सोशल मीडिया पर 13 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स रखने वाली पम्मी अब उन तमाम महिलाओं के लिए मिसाल बन गई हैं, जो उम्र के कारण अपने सपनों का त्याग कर देती हैं। उनके लिए नीट सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि 25 साल पुराने उस वादे को निभाने का जरिया है जो उन्होंने खुद से किया था।
प्रेरणा का केंद्र बनी पम्मी की अटूट हिम्मत
पम्मी कुंडू का यह सफर समाज को संदेश देता है कि सीखने और सफल होने की कोई निश्चित उम्र नहीं होती। जिस उम्र में लोग करियर के आखिरी पड़ाव पर होते हैं, वहां पम्मी एक नई शुरुआत कर रही हैं। उनकी कहानी फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रही है। लोग उनकी हिम्मत को सलाम कर रहे हैं, क्योंकि उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर लगन सच्ची हो, तो समय के थपेड़े भी आपके हौसले को कम नहीं कर सकते।


