Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में आई भारी उछाल ने आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। कमर्शियल सिलेंडर के दाम में एक साथ 993 रुपये की बड़ी वृद्धि की गई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता है। इसका सीधा असर अब घरेलू बाजार पर दिखने लगा है। पिछले तीन महीनों से लगातार बढ़ती कीमतों ने रेस्तरां संचालकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
रेस्टोरेंट कारोबार पर गहराया संकट और कालाबाजारी का डर
ईंधन की कीमतों में हुए इस बेतहाशा इजाफे से रेस्तरां उद्योग पर भारी दबाव है। उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सिलेंडर की उपलब्धता कम होने से असंगठित क्षेत्रों में कालाबाजारी बढ़ रही है। जो सिलेंडर पहले रियायती दरों पर करीब 1,300 रुपये में मिलता था, उसकी कीमत अब 4,000 रुपये तक पहुंच रही है। एक औसत रेस्तरां में रोजाना कई सिलेंडर की खपत होती है। ऐसे में संचालन लागत बढ़ने से छोटे प्रतिष्ठान बंदी की कगार पर पहुंच सकते हैं।
खाने की थाली होगी महंगी और रोजगार पर पड़ेगा असर
रेस्तरां संचालकों का मानना है कि यदि कीमतों में बढ़ोतरी का यह रुझान जारी रहा, तो खाने के दाम बढ़ाना मजबूरी होगी। लॉजिस्टिक्स और परिवहन लागत में 50 प्रतिशत की वृद्धि ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। संचालक फिलहाल अपने कर्मचारियों का वेतन समय पर देने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, लंबे समय तक यह दबाव झेलना उनके लिए मुश्किल होगा। इससे न केवल ग्राहकों के लिए बाहर खाना महंगा होगा, बल्कि इस क्षेत्र में रोजगार पर भी संकट आ सकता है।
समाधान के लिए पीएनजी कनेक्शन अपनाने की मिली सलाह
एलपीजी की बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए विशेषज्ञों ने रेस्तरां को इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के पाइप वाली रसोई गैस (पीएनजी) अपनाने का सुझाव दिया है। पीएनजी को सिलेंडर के मुकाबले अधिक किफायती और सुरक्षित विकल्प माना जाता है। हालांकि, मौजूदा बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियों के कारण सभी छोटे प्रतिष्ठानों के लिए तुरंत स्विच करना आसान नहीं है। रेस्तरां मालिकों का कहना है कि सरकार को इस संकट की घड़ी में उद्योग को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
वैश्विक संघर्ष का घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा सीधा प्रभाव
ईरान और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक कच्चे तेल और गैस की कीमतों में आग लगा दी है। इसके चलते भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों में ऊर्जा लागत तेजी से बढ़ रही है। दिल्ली के रेस्तरां संचालकों और रेहड़ी-पटरी वालों का कहना है कि आर्थिक दबाव अब असहनीय होता जा रहा है। ईंधन के साथ-साथ अन्य खाद्य सामग्रियों के दाम भी परिवहन महंगा होने के कारण बढ़ रहे हैं। यह स्थिति आने वाले दिनों में शहरी मध्यम वर्ग के बजट को पूरी तरह बिगाड़ सकती है।


