लाल किला ब्लास्ट कनेक्शन और 493 करोड़ का महाघपला: अल फलाह यूनिवर्सिटी कांड में साकेत कोर्ट का बड़ा फैसला

Delhi News: लाल किला ब्लास्ट केस से जुड़े ‘अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट’ पर कानून का शिकंजा और कस गया है। दिल्ली की साकेत कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले के मुख्य आरोपी जवाद अहमद सिद्दीकी की नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में खुलासा हुआ है कि इस ट्रस्ट ने न केवल वित्तीय धोखाधड़ी की, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ किया। यूनिवर्सिटी के नाम पर करीब 493.24 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का बड़ा साम्राज्य खड़ा किया गया था।

मेडिकल कॉलेज में फर्जीवाड़े का खेल और ED का एक्शन

प्रवर्तन निदेशालय की जांच में अल फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज में चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आई हैं। एजेंसी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज ने ‘नेशनल मेडिकल कमिशन’ से मान्यता प्राप्त करने के लिए भारी धांधली की। यहां कागजों पर फैकल्टी दिखाई गई और फर्जी मरीजों के जरिए इंस्पेक्शन को गुमराह किया गया। यह पूरा तंत्र केवल छात्रों और अभिभावकों से मोटी फीस वसूलने के लिए बनाया गया था। ईडी ने अब तक इस गिरोह की 179.4 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क कर लिया है।

यूनिवर्सिटी की मान्यता और भारी भरकम अवैध कमाई

जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने अपनी समाप्त हो चुकी ‘नैक’ (NAAC) मान्यता को वैध बताकर प्रचारित किया। इसके अलावा, यूजीसी एक्ट की धारा 12(B) के तहत फर्जी दावे करके एडमिशन लिए गए। इस जालसाजी के जरिए यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने लगभग 493.24 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की। कुर्क की गई संपत्तियों में आरोपियों के आलीशान मकान, बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट और यूनिवर्सिटी की जमीनें शामिल हैं। ईडी ने जवाद अहमद के खिलाफ पहले ही चार्जशीट दाखिल कर दी है।

लाल किला ब्लास्ट और आतंकियों से सीधा संबंध

यह मामला महज एक वित्तीय घोटाला नहीं है, बल्कि इसके तार आतंकवाद से भी जुड़े हैं। ईडी के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी का चांसलर एक अन्य एफआईआर में भी नामजद है, जो यूएपीए (UAPA) के तहत दर्ज है। चांसलर पर विस्फोटक सामग्री तैयार करने और आतंकियों को पनाह देने जैसे संगीन आरोप हैं। ये वही आतंकी थे जिनका संबंध ऐतिहासिक लाल किला ब्लास्ट से था। दिल्ली पुलिस की एफआईआर को आधार बनाकर ही ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।

नेटवर्क की पहचान और भविष्य की जांच

प्रवर्तन निदेशालय इस पूरे सिंडिकेट में शामिल अन्य चेहरों और बेनामी संपत्तियों की बारीकी से पहचान कर रहा है। एजेंसी का मानना है कि इस नेटवर्क में कुछ और प्रभावशाली लोग शामिल हो सकते हैं जिन्होंने शिक्षा की आड़ में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को वित्तपोषित किया। साकेत कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने से जांच एजेंसी का पक्ष और मजबूत हुआ है। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां और कुर्की की कार्रवाई संभव है।

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