Uttar Pradesh News: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने तीन दशक पुराने एक सनसनीखेज हत्याकांड के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। खुद को सोशल मीडिया स्टार और यूट्यूबर बताने वाला ‘सलीम वास्तिक’ असल में 1995 के एक अपहरण और हत्या मामले का सजायाफ्ता मुजरिम निकला। पहचान छिपाकर 31 साल तक पुलिस को चकमा देने वाला यह अपराधी अब सलाखों के पीछे है। उसकी गिरफ्तारी ने 1995 के उस खौफनाक मंजर की यादें ताजा कर दी हैं, जिसने राजधानी को हिलाकर रख दिया था।
कुंगफू मास्टर से खूंखार अपराधी बनने तक का सफर
सलीम वास्तिक का जन्म 1972 में उत्तर प्रदेश के शामली स्थित नानूपुरा मोहल्ले में हुआ था। वह मार्शल आर्ट्स और शाओलिन कुंगफू का माहिर खिलाड़ी था, जिसके दम पर उसने दिल्ली के दरियागंज में मार्शल आर्ट्स इंस्ट्रक्टर के तौर पर करियर शुरू किया। हालांकि, रसूख और बेहिसाब पैसा कमाने की चाहत ने उसे अपराध की दुनिया में धकेल दिया। उसके बड़े भाई मुजफ्फर हसन के मुताबिक, सलीम ने दौलत के लालच में बहुत पहले ही परिवार से नाता तोड़कर गलत रास्ता अख्तियार कर लिया था।
1995 का वह कांड: मासूम संदीप बंसल की बेरहमी से हत्या
सलीम पर जिस जघन्य अपराध का आरोप है, वह 1995 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुआ था। वहां के एक नामी कारोबारी के 13 वर्षीय बेटे संदीप बंसल का अपहरण कर लिया गया था। अपहरणकर्ताओं ने परिवार से 30 हजार रुपये की फिरौती मांगी थी। जांच के दौरान पुलिस का शक सलीम खान पर गया, जो उसी स्कूल में मार्शल आर्ट्स ट्रेनर था। पूछताछ में उसने जुर्म कबूल किया और खुलासा किया कि फिरौती के लालच में उसने मासूम की हत्या कर दी थी।
उम्रकैद की सजा और पैरोल के बाद पहचान बदलकर फरारी
साल 1997 में अदालत ने इस मामले में सलीम और उसके सहयोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, साल 2000 में उसे दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिली, जिसके बाद वह कभी वापस जेल नहीं लौटा और फरार हो गया। फरारी के दौरान उसने अपनी पूरी पहचान बदल ली और ‘सलीम वास्तिक’ के नाम से हरियाणा और उत्तर प्रदेश में छिपकर रहने लगा। उसने ‘Salim Vastik 0007’ नाम से यूट्यूब चैनल बनाकर अपनी नई छवि सोशल मीडिया पर गढ़ी थी।
यूट्यूबर बनने की कहानी और लोनी में हुए हमले से खुला राज
हैरानी की बात यह है कि सलीम की फर्जी कहानी पर फिल्म बनाने के लिए एक प्रोड्यूसर ने उसे 15 लाख रुपये तक एडवांस दे दिए थे। उसकी फरारी का अंत पिछले साल गाजियाबाद के लोनी में उस पर हुए एक जानलेवा हमले के बाद शुरू हुआ। उस हमले में सलीम को 14 चाकू मारे गए थे, जिसकी जांच के दौरान दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को उसकी पुरानी पहचान का सुराग मिला। रिकॉर्ड और फिंगरप्रिंट के मिलान के बाद पुलिस ने आखिरकार उसे लोनी से गिरफ्तार कर लिया।
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की बड़ी सफलता
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के डीसीपी संजीव यादव ने बताया कि पुख्ता सूचना और तकनीकी जांच के आधार पर सलीम वास्तिक को पकड़ा गया है। पुलिस अब उससे यह जानने की कोशिश कर रही है कि उसने 31 साल तक कानून की नजरों से बचकर अपनी नई पहचान कैसे बनाए रखी। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि फरारी के दौरान उसने और किन अपराधों को अंजाम दिया है। इस गिरफ्तारी ने साबित कर दिया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं।
