Delhi News: दिल्ली यूनिवर्सिटी का प्रतिष्ठित हंसराज कॉलेज इस समय विवादों के केंद्र में है। कॉलेज प्रशासन ने अनुशासनहीनता और संस्थान की छवि धूमिल करने के आरोप में करीब 30 छात्रों को निलंबित कर दिया है। सस्पेंड होने वाले छात्रों में कॉलेज यूनियन के चार प्रमुख पदाधिकारी भी शामिल हैं। प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए इन छात्रों के कैंपस प्रवेश पर तब तक के लिए रोक लगा दी है, जब तक अनुशासनात्मक जांच पूरी नहीं हो जाती। इस फैसले के बाद डूसू (DUSU) अध्यक्ष ने प्रशासन पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है।
फेस्ट के दौरान हंगामा और सोशल मीडिया पोस्ट बनी वजह
कॉलेज प्रशासन के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई 8 और 9 अप्रैल को आयोजित हुए एनुअल फेस्ट के दौरान हुई घटनाओं से जुड़ी है। अनुशासन समिति ने अपनी जांच में पाया कि कई छात्रों ने फेस्ट के दौरान कैंपस की व्यवस्था खराब की और हिंसा में शामिल रहे। इसके अलावा, छात्रों पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कॉलेज के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और संस्थान को बदनाम करने के गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। 20 से 25 अप्रैल के बीच जारी हुए अलग-अलग नोटिस के जरिए अब तक 30 छात्रों पर गाज गिर चुकी है।
सस्पेंशन लेटर में सख्त निर्देश: सिर्फ एग्जाम के लिए मिलेगी एंट्री
प्रशासन द्वारा जारी किए गए नोटिस में यह स्पष्ट किया गया है कि निलंबित छात्र अगले आदेश तक कॉलेज परिसर में नहीं घुस सकेंगे। हालांकि, छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें केवल परीक्षा देने और इंटरनल असेसमेंट (IA) के लिए कॉलेज आने की अनुमति दी गई है। नोटिस में निलंबन की कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है। प्रशासन ने कहा है कि जब तक विभागीय जांच चल रही है, तब तक ये छात्र शैक्षणिक गतिविधियों और कैंपस लाइफ से पूरी तरह दूर रहेंगे।
DUSU अध्यक्ष आर्यन मान ने बताया ‘प्रशासनिक ताकत का दुरुपयोग’
दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (DUSU) के अध्यक्ष आर्यन मान ने इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि यह उभरते हुए छात्र नेताओं को कुचलने का एक प्रयास है। आर्यन मान के अनुसार, निलंबित छात्र वही प्रतिनिधि हैं जो लंबे समय से छात्र हितों के लिए लड़ रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन की नाकामियों को उजागर करना और सच बोलना अब अपराध की श्रेणी में आता है? उन्होंने इस फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
नोटिस की टाइमलाइन और छात्रों पर लगे आरोप
सस्पेंशन का सिलसिला 20 अप्रैल को शुरू हुआ था, जब पहले एक छात्र को संस्थान को बदनाम करने का दोषी मानकर बाहर किया गया। इसके बाद दूसरे नोटिस में एक साथ 14 छात्रों को बाहर का रास्ता दिखाया गया। कॉलेज प्रशासन का तर्क है कि टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करना और कैंपस में अनुशासनहीनता फैलाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है और कॉलेज परिसर में तनाव का माहौल बना हुआ है।
