Chennai News: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों ने चेन्नई की रॉयापुरम सीट पर एक ऐसा राजनीतिक चमत्कार कर दिखाया है, जिसकी कल्पना अनुभवी विश्लेषकों ने भी नहीं की थी। पेशे से ऑटो ड्राइवर और ‘विजय मक्कल इयक्कम’ के पुराने सदस्य के. विजय धामु ने अपनी पहली चुनावी पारी में ही दिग्गजों को धूल चटा दी है। अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के टिकट पर लड़ते हुए धामु ने 59,091 मत प्राप्त कर शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने लगभग 14,249 मतों के अंतर से अपनी जीत सुनिश्चित कर रॉयापुरम के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है।
पांच बार के विधायक और पूर्व मंत्री डी. जयकुमार की करारी हार
इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला पहलू अन्नाद्रमुक (AIADMK) के कद्दावर नेता डी. जयकुमार का प्रदर्शन रहा। पांच बार विधायक रह चुके और क्षेत्र के ‘अजेय’ नेता माने जाने वाले जयकुमार इस त्रिकोणीय मुकाबले में तीसरे स्थान पर खिसक गए। उन्हें मात्र 18,000 के आसपास वोट मिले, जो उनके राजनीतिक भविष्य के लिए एक बड़ा संकेत है। वहीं, सत्तारूढ़ द्रमुक (DMK) के उम्मीदवार सुबैर खान 44,842 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे, लेकिन वे भी टीवीके की इस “आम आदमी लहर” को रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुए।
ऑटो स्टैंड से विधानसभा तक का प्रेरक सफर
विजय धामु की जीत केवल एक चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि ‘जमीनी कार्यकर्ताओं’ की सफलता का प्रतीक है। केवल 8वीं पास शैक्षणिक योग्यता रखने वाले धामु ने अपना पूरा प्रचार एक साधारण ऑटो ड्राइवर के रूप में किया, जिससे स्थानीय जनता सीधे तौर पर उनसे जुड़ सकी। उनकी 28.9 लाख रुपये की कुल संपत्ति और कोई देनदारी न होने का साफ सुथरा रिकॉर्ड मतदाताओं के बीच ईमानदारी की मिसाल बना। पार्टी प्रमुख विजय के साथ उनकी वह भावुक तस्वीर, जिसमें वे उन्हें गले लगाकर रो रहे थे, अब सोशल मीडिया पर ‘साधारण बनाम खास’ की इस लड़ाई का चेहरा बन गई है।
मछुआरा समुदाय और ‘थलापति’ फैक्टर ने बदला समीकरण
रॉयापुरम एक तटीय क्षेत्र है जहां मछुआरा समुदाय की बड़ी आबादी निवास करती है। विजय धामु ने अपने चुनावी घोषणापत्र में इस समुदाय के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक सुरक्षा का जो वादा किया, उसने स्थानीय लोगों का दिल जीत लिया। इसके अलावा, टीवीके प्रमुख विजय की “स्टार पावर” और हर सीट पर खुद को चेहरा बनाकर लड़ने की रणनीति ने धामु जैसे नए चेहरों को ‘जायंट किलर’ बनने में मदद की। इस जीत के साथ ही टीवीके ने राज्य की 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाकर द्रविड़ राजनीति के दशकों पुराने द्वंद्व को समाप्त करने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं।


