Kerala News: केरल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य में एक दशक बाद सत्ता परिवर्तन की पटकथा लिख दी है। सोमवार को आए परिणामों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने 99 सीटों पर ऐतिहासिक बढ़त और जीत के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। निवर्तमान वामपंथी सरकार (LDF) को मात्र 40 सीटों पर सिमटना पड़ा है। सत्ता में यूडीएफ की इस प्रचंड वापसी के साथ ही अब तिरुवनंतपुरम के गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?
वी.डी. सतीशन: विपक्ष के नेता से मुख्यमंत्री पद तक का सफर?
विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन को मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है। उन्होंने अपनी पारंपरिक सीट परवूर से सीपीआई के ई.टी. टायसन मास्टर को 20,600 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया है। सतीशन ने पिछले पांच वर्षों में विपक्ष को एकजुट रखने और सरकार विरोधी लहर को भुनाने में अहम भूमिका निभाई है। जीत के बाद उन्होंने कहा कि गठबंधन का लक्ष्य केरल को भ्रष्टाचार मुक्त शासन देना है और नेतृत्व का अंतिम फैसला दिल्ली स्थित हाईकमान द्वारा ही लिया जाएगा।
रमेश चेन्निथला और के.सी. वेणुगोपाल की मजबूत दावेदारी
पूर्व गृहमंत्री और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला ने हरिपाड सीट से 23,377 मतों के अंतर से जीत दर्ज कर अपनी सांगठनिक शक्ति का प्रदर्शन किया है। उनके पास शासन का लंबा अनुभव है, जो उनकी दावेदारी को मजबूती प्रदान करता है। वहीं, कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल का नाम भी दिल्ली के राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि वेणुगोपाल वर्तमान में सांसद हैं, लेकिन पार्टी आलाकमान के साथ उनकी निकटता उन्हें रेस में ‘डार्क हॉर्स’ के रूप में स्थापित करती है।
नेतृत्व चयन की प्रक्रिया और हाईकमान का अंतिम फैसला
कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री के चयन के लिए पार्टी की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। जल्द ही तिरुवनंतपुरम में नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें एआईसीसी के पर्यवेक्षक भी शामिल होंगे। सहयोगी दलों जैसे आईयूएमएल और केरल कांग्रेस (जोसेफ) के साथ विचार-विमर्श के बाद रिपोर्ट हाईकमान को भेजी जाएगी। पार्टी के भीतर एक वर्ग शशि थरूर के नाम पर भी विचार करने की चर्चा कर रहा है, जिन्होंने हाल के चुनावों में यूडीएफ के प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई है।
एलडीएफ का पतन और भाजपा की सांकेतिक मौजूदगी
इन परिणामों ने पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ के ‘तीसरे कार्यकाल’ (LDF-3) के सपने को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। स्वयं मुख्यमंत्री विजयन धर्मदम सीट पर कड़े मुकाबले में फंसे रहे, जबकि उनके मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नेमोम सहित तीन सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। केरल की जनता ने स्पष्ट रूप से बदलाव के पक्ष में मतदान कर सुशासन और नई कार्य संस्कृति की अपनी आकांक्षा को व्यक्त किया है।


