Tamil Nadu News: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के सोमवार को घोषित परिणामों में एडप्पाडी विधानसभा सीट पर अन्नाद्रमुक (AIADMK) का वर्चस्व कायम रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक के दिग्गज नेता एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (EPS) ने अपने गृह क्षेत्र में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पलानीस्वामी ने कुल 1,48,933 मत प्राप्त किए, जो उनके अटूट जनाधार को दर्शाता है। इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी, निर्दलीय प्रत्याशी प्रेमकुमार को 98,110 वोटों के भारी अंतर से पराजित कर अपनी राजनीतिक शक्ति का लोहा मनवाया है।
एडप्पाडी के किले में पलानीस्वामी ने तोड़े जीत के पुराने रिकॉर्ड
सलेम जिले की एडप्पाडी सीट पिछले कई दशकों से अन्नाद्रमुक और विशेष रूप से पलानीस्वामी का अभेद्य दुर्ग रही है। इस बार के चुनाव में ईपीएस ने न केवल अपनी सीट बचाई, बल्कि जीत के अंतर को भी नया विस्तार दिया है। उनके मुख्य प्रतिद्वंदी माने जा रहे डीएमके प्रत्याशी काशी सी को मात्र 44,011 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर खिसक गए। वहीं, अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार प्रेमकुमार ने 50,823 वोट लेकर दूसरा स्थान हासिल किया, लेकिन वे पलानीस्वामी की आंधी को रोकने में पूरी तरह विफल रहे।
कृषि और सादगी पर आधारित चुनावी घोषणापत्र का असर
पलानीस्वामी ने चुनाव आयोग को दिए अपने हलफनामे में खुद को एक किसान के रूप में पेश किया था, जो उनकी जीत का एक मुख्य कारण बना। 12वीं पास शैक्षणिक योग्यता रखने वाले ईपीएस ने अपनी कुल संपत्ति 9 करोड़ रुपये घोषित की है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने क्षेत्र में सिंचाई परियोजनाओं, सड़क निर्माण और स्थानीय विकास कार्यों को अपनी प्राथमिकता बताया। उनकी वार्षिक आय 26.1 लाख रुपये है और उन्होंने अपने खिलाफ 5 लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी भी साझा की थी, हालांकि इनमें से कोई भी गंभीर श्रेणी का नहीं था।
तमिलनाडु की राजनीति में पलानीस्वामी के बढ़ते कद के मायने
एडप्पाडी सीट पर मिली यह प्रचंड जीत न केवल पलानीस्वामी के व्यक्तिगत नेतृत्व को मजबूती प्रदान करती है, बल्कि अन्नाद्रमुक के लिए भी एक नई ऊर्जा का संचार करती है। 23 अप्रैल को हुए मतदान के बाद 4 मई के परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिमी तमिलनाडु में पलानीस्वामी की पकड़ आज भी उतनी ही मजबूत है जितनी उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान थी। उनके समर्थकों का मानना है कि यह जीत आने वाले समय में राज्य की राजनीति में अन्नाद्रमुक के पुनरुद्धार और विपक्षी एकता के केंद्र के रूप में ईपीएस की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाएगी।


