मंडी में कुदरत का कहर: भारी ओलावृष्टि से सेब और मटर की फसल तबाह, जनजीवन अस्त-व्यस्त

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में बुधवार को मौसम ने अचानक रौद्र रूप धारण कर लिया। सराज क्षेत्र में हुई भीषण ओलावृष्टि ने किसानों और बागवानों को भारी आर्थिक चोट पहुंचाई है। जोगेंद्रनगर में तेज अंधड़ और मूसलाधार बारिश के कारण सामान्य जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया। आंधी की तीव्रता इतनी अधिक थी कि हाईवे पर लगे भारी होर्डिंग बोर्ड उखड़कर सड़कों पर आ गिरे। इससे यातायात लंबे समय तक बाधित रहा और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

सराज घाटी में ओलों ने बर्बाद की महीनों की मेहनत

एप्पल वैली के नाम से विख्यात सराज घाटी में शनिवार दोपहर को कुदरत का कहर बरपा। महज 15 मिनट की ओलावृष्टि ने थाची, बगस्याड और थुनाग जैसे इलाकों में तबाही मचा दी। बागवानों के अनुसार, इस साल सेब की फसल बहुत अच्छी होने की उम्मीद थी। ओलों की मार से सेब के दानों पर गहरे दाग पड़ गए हैं और मटर के पौधे जड़ से उखड़ गए हैं। किसानों की छह से आठ महीने की मेहनत मिट्टी में मिल गई है।

जोगेंद्रनगर में अंधड़ से टला बड़ा हादसा

जोगेंद्रनगर में मौसम के बिगड़े मिजाज ने लोगों को दहशत में डाल दिया। तेज हवाओं के कारण कई बहुमंजिला इमारतों की छतों से सामान नीचे गिर गया। गनीमत रही कि उस समय वहां कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। अचानक आई इस आपदा ने शादी समारोहों के रंग में भी भंग डाल दिया। तेज बारिश और अंधड़ के कारण मेजबान और मेहमान सुरक्षित स्थानों की तलाश में भागते नजर आए। पूरे क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति भी बाधित रही।

फसल नुकसान का प्रारंभिक आकलन

स्थानीय किसानों का कहना है कि प्रारंभिक आकलन के अनुसार क्षेत्र में 20 से 40 फीसदी फसल बर्बाद हो चुकी है। किसान जवाहर लाल और उत्तम सिंह ने बताया कि मटर की फसल पूरी तरह खराब हो गई है। बागवान अब सरकार से मुआवजे की गुहार लगा रहे हैं। ओलावृष्टि के बाद सेब के पेड़ों में बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने और प्रभावित पौधों की उचित देखभाल करने की सलाह दी है।

बागवानी विभाग ने जारी की विशेष एडवाइजरी

गंभीर स्थिति को देखते हुए बागवानी विभाग ने किसानों के लिए तत्काल बचाव के उपाय सुझाए हैं। बागवानी अधिकारी नवीन कुमार ने प्रभावित बागवानों को 24 घंटे के भीतर दवाओं के छिड़काव की सलाह दी है। किसानों को प्रति 200 लीटर पानी में 600 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड और 100 ग्राम कार्बेंडाजिम मिलाकर स्प्रे करने को कहा गया है। इसके कुछ दिनों बाद बोरिक एसिड और जिंक सल्फेट का छिड़काव करने से फसल की रिकवरी में काफी मदद मिल सकती है।

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