Delhi News: दिल्ली के पॉश इलाकों में सुरक्षा और सुविधा के नाम पर बिल्डिंग बाय-लॉज का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। विवेक विहार जैसी नामचीन कॉलोनियों में हाल ही में हुए हादसों ने यह साबित कर दिया है कि ये उल्लंघन जानलेवा साबित हो रहे हैं। एमसीडी के बिल्डिंग विभाग की नाक के नीचे नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। भ्रष्टाचार और अधिकारियों की मिलीभगत के कारण रिहायशी परिसरों में अवैध जेलनुमा जालियां और अवरुद्ध निकास द्वार आम बात हो गए हैं।
नक्शों की जांच के नाम पर महज खानापूर्ति
दिल्ली में एकीकृत बिल्डिंग बाय-लॉज लागू हैं, जिसके तहत मकानों के निर्माण और मरम्मत की सख्त अनुमति दी जाती है। नियम के मुताबिक, हर साल पास किए गए कम से कम 10 प्रतिशत नक्शों की जमीनी जांच अनिवार्य है। हालांकि, हकीकत में यह प्रक्रिया केवल कागजी खानापूर्ति और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है। अगर एमसीडी समय रहते इन इमारतों में अवैध रूप से लगाई गई लोहे की भारी जालियों की जांच करती, तो कई मासूमों की जान बचाई जा सकती थी।
लाखों अवैध निर्माण और सुस्त प्रशासनिक तंत्र
एमसीडी के ईज ऑफ डूइंग पोर्टल के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। पिछले पांच वर्षों में महज 21,000 नक्शे पास हुए हैं, जबकि दिल्ली में लाखों की संख्या में निर्माण कार्य हुए हैं। निगम हर साल लगभग 70 से 75 हजार अवैध निर्माणों को चिह्नित तो करता है, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव में अनधिकृत कॉलोनियों का जाल फैलता जा रहा है। दिल्ली की 2000 से अधिक अवैध कॉलोनियां इस प्रशासनिक विफलता और एजेंसियों की मिलीभगत का सबसे बड़ा प्रमाण हैं।
आपातकालीन निकास पर अवैध कब्जों का खेल
अक्सर बिल्डर और डीडीए फ्लैट्स में ऊपरी मंजिल के निवासी छत को निजी संपत्ति मानकर वहां ताला लगा देते हैं। सुरक्षा का हवाला देकर किया जाने वाला यह कृत्य विशेषज्ञों की नजर में बेहद खतरनाक और अवैध है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि सीढ़ियां और छत आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) के लिए होती हैं। किसी भी आपदा की स्थिति में इन रास्तों का बंद होना जानलेवा साबित होता है, क्योंकि धुएं और आग के बीच फंसे लोगों के पास निकलने का कोई रास्ता नहीं बचता।
नियोजित कॉलोनियों में ये गतिविधियां हैं अवैध
दिल्ली की नियोजित कॉलोनियों में पार्किंग क्षेत्र में घरेलू सहायकों के लिए कमरे बनाना या पोटा केबिन रखना पूरी तरह गैरकानूनी है। इसके अलावा तय सीमा से अधिक निर्माण करना, शाफ्ट और सेटबैक एरिया में लोहे की जालियां लगाना और सीढ़ियों का आकार छोटा करना भी नियमों का उल्लंघन है। सेटबैक एरिया को खुला रखना अनिवार्य है ताकि वेंटिलेशन बना रहे। इन नियमों की अनदेखी पर एमसीडी फिलहाल चुप्पी साधे हुए है, जो गंभीर सवाल खड़े करता है।


