विवेक विहार अग्निकांड: जब फरिश्ते बनकर आए पड़ोसी, अपनी जान पर खेलकर बचाई 15 जिंदगियां

Delhi News: दिल्ली के विवेक विहार इलाके में देर रात भीषण आग ने कोहराम मचा दिया, जहां बी-ब्लॉक की एक इमारत आग का गोला बन गई। इस भयावह मंजर के बीच पड़ोसियों और दमकल कर्मियों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए 15 लोगों की जान बचाई। जब आग की लपटें लोगों को अपनी चपेट में ले रही थीं, तब गुरदीप सिंह और जगदीश सिंह जैसे पड़ोसी देवदूत बनकर सामने आए और राहत कार्य शुरू किया।

गद्दे बिछाकर बचाई मासूमों की जान

हादसे के वक्त नवीन जैन की दो बेटियां दूसरी मंजिल की बालकनी में फंसी हुई थीं और मदद के लिए चीख रही थीं। भीषण आग के कारण अंदर से निकलना असंभव था और उनकी माता की इस हादसे में मृत्यु हो गई थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पड़ोसी गुरदीप सिंह तुरंत अपने घर से गद्दे ले आए और उन्हें नीचे बिछा दिया। दोनों लड़कियों ने बालकनी से नीचे छलांग लगाई और गद्दों के कारण उन्हें केवल मामूली चोटें आईं।

ग्राइंडर और जेनसेट से मिली मदद

बचाव अभियान के दौरान लोहे की मजबूत जालियां सबसे बड़ी बाधा साबित हुईं। जब दमकल विभाग के कटर मशीनों ने काम करना बंद कर दिया, तब जगदीश गिल ने ग्राइंडर और ब्लेड का इंतजाम किया। इमारत की बिजली कटी होने के कारण ग्राइंडर चलाने के लिए पड़ोसियों ने अपने निजी जेनसेट से बिजली उपलब्ध कराई। करीब 20 मिनट की मशक्कत के बाद जाली काटकर बड़ा सुराख बनाया गया, जिससे चार से पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

सजावटी सामान ने बढ़ाई आग की तपिश

बचाव कर्मियों के अनुसार, फ्लैटों के भीतर सजावट के लिए लकड़ी और प्लास्टिक जैसे अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थों का भारी मात्रा में उपयोग किया गया था। ड्राइंग रूम से लेकर बेडरूम तक में मौजूद इन सामानों ने आग को और अधिक भयावह बना दिया। आग इतनी भीषण थी कि इसने पास की इमारतों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया था। बाईं ओर स्थित एक पड़ोसी की बालकनी में रखा सारा सामान जलकर पूरी तरह राख हो गया।

अवैध निर्माण और पार्किंग बनी चुनौती

इस हादसे ने शहरी नियोजन और सुरक्षा नियमों की अनदेखी को भी उजागर किया है। इमारत के सेट बैक एरिया को लोहे की जालियों से पूरी तरह कवर किया गया था, जिससे निकासी का रास्ता बंद था। इसके अलावा, सीढ़ियों के सामने खड़ी कारों और सर्विस लेन में किए गए अवैध निर्माण के कारण दमकल की गाड़ियों को पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई घरों के सामने रखे जेनसेट और संकरी गलियों ने रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा उत्पन्न की।

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