Delhi News: पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार में हुआ भीषण अग्निकांड महज एक हादसा नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और मानवीय लालच का जीता-जागता उदाहरण है। इस अग्निकांड में नौ लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरी दिल्ली को हिलाकर रख दिया है। बाहर से बेहद आलीशान दिखने वाली यह चार मंजिला इमारत वास्तव में रहने वालों के लिए ‘मौत का जाल’ साबित हुई। आग लगने के दौरान इमारत की बनावट और सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने बचाव कार्यों को पूरी तरह असंभव बना दिया था।
मात्र ढाई फीट की सीढ़ी बनी काल का रास्ता
करीब 800 गज में फैली इस विशाल इमारत में सुरक्षा के न्यूनतम मानकों को भी दरकिनार किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी बिल्डिंग में कम से कम दो चौड़ी सीढ़ियों का होना अनिवार्य है। इसके विपरीत, यहां केवल एक ही सीढ़ी थी जिसकी चौड़ाई महज ढाई फीट थी। आग लगने के बाद मची भगदड़ में लोग इसी संकरे रास्ते में फंस गए। आपात स्थिति के लिए कोई वैकल्पिक निकास (Emergency Exit) न होना सबसे बड़ी लापरवाही के रूप में सामने आया है।
सुरक्षा के नाम पर लगाए गए इंतजाम ही बने घातक
इमारत में चोरी रोकने के लिए लगाए गए आधुनिक सुरक्षा उपकरण ही निवासियों के लिए जानलेवा साबित हुए। फ्लैटों में इलेक्ट्रॉनिक लॉक लगाए गए थे जो आग लगने पर बिजली गुल होते ही जाम हो गए। इसके अलावा, बालकनियों को लोहे की भारी ग्रिल से पूरी तरह कवर किया गया था। धुएं और लपटों के बीच लोग न तो दरवाजा खोल पाए और न ही बालकनी से कूद सके। इमारत में आग बुझाने के लिए एक भी अग्निशमन यंत्र मौजूद नहीं था।
एमसीडी की कार्यप्रणाली और नियमों के उल्लंघन पर सवाल
दिल्ली नगर निगम (MCD) के बिल्डिंग बायलाज के अनुसार, एक फ्लोर पर केवल एक ही फ्लैट का निर्माण किया जा सकता है। इसके बावजूद, मुनाफाखोरी के चक्कर में हर मंजिल पर आगे-पीछे दो-दो फ्लैट बना दिए गए थे। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि नियमों के इतने स्पष्ट उल्लंघन के बाद भी विभाग ने इस इमारत को पूर्णता प्रमाण पत्र (Completion Certificate) कैसे जारी किया। क्या अधिकारियों ने सब जानते हुए भी भ्रष्टाचार के कारण अपनी आंखें मूंद ली थीं?
उच्च स्तरीय जांच के आदेश और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा
हादसे की सूचना मिलते ही केंद्रीय राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा सहित कई बड़े नेता मौके पर पहुंचे। हर्ष मल्होत्रा ने घटना को हृदय विदारक बताते हुए इसकी हर पहलू से गहन जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी अधिकारी या व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद पहुंचाने और दोषियों को चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।


