वोट नहीं, पर्ची से प्रधान चुनते हैं इस गांव के लोग! देवता के डर से चुनाव प्रचार की सख्त मनाही

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव की सरगर्मियां काफी तेज हो गई हैं। उम्मीदवार मैदान में उतर चुके हैं। लेकिन सिरमौर जिले की टिटियाना पंचायत ने राज्य के सामने अनोखी मिसाल पेश की है। यहाँ लोग मतदान से नहीं, बल्कि पर्ची सिस्टम से अपना प्रधान चुनते हैं। कोई भी उम्मीदवार चुनाव प्रचार पर एक भी रुपया खर्च नहीं करता है। करीब चार सौ परिवारों और दो हजार मतदाताओं वाले इस गांव के लोग चुनाव पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराते हैं।

महंगे चुनाव और आपसी रंजिश ने बदली गांव की पुरानी परंपरा

कुछ साल पहले तक इस गांव में आम पंचायतों की तरह चुनाव होते थे। प्रचार के दौरान उम्मीदवार बहुत ज्यादा पैसा खर्च करते थे। इससे गांव के लोगों में भारी गुटबाजी और दुश्मनी बढ़ गई थी। हार और जीत का तनाव इतना ज्यादा होता था कि हारा हुआ गुट शादियों तक में जाना बंद कर देता था। इस बढ़ते तनाव और खत्म होते भाईचारे को देखकर गांव के बुजुर्गों और प्रबुद्ध लोगों ने एक बड़ा और बहुत ही सख्त फैसला लिया।

महासू देवता के सामने खाई कसम, नियम तोड़ने पर हुक्का-पानी बंद

पांच साल पहले गांव वालों ने ईष्ट देवता महासू महाराज के मंदिर में बैठक बुलाई। ग्रामीणों ने फैसला लिया कि अब पंचायत में वे कभी चुनाव नहीं कराएंगे। सभी ने देवता के सामने कसम खाई कि लोग प्रतिनिधियों का चुनाव सिर्फ पर्ची से करेंगे। अगर कोई व्यक्ति इस फैसले को नहीं मानता है, तो ग्रामीण उस पर भारी जुर्माना लगाते हैं। नियम तोड़ने वाले व्यक्ति का हुक्का-पानी बंद कर पूरे गांव को भोज कराने का सख्त नियम लोगों ने बनाया है।

चार खेमों में बंटा है गांव, नामांकन से पहले निकलती है पर्ची

ग्रामीणों ने पंचायत को चार अलग-अलग बेड़ों या खेमों में बांटा है। चुनाव के समय ग्रामीण हर बार बारी-बारी से एक खेमे का नंबर लगाते हैं। चुनाव लड़ने वाले इच्छुक उम्मीदवारों के नाम की पर्चियां डालते हैं। जिस भी उम्मीदवार के नाम की पर्ची निकलती है, लोग उसे ही अपना प्रधान चुन लेते हैं। पर्ची निकलने के बाद सिर्फ वही उम्मीदवार अपना नामांकन भरता है। गांव का कोई भी दूसरा व्यक्ति उसके खिलाफ अपना नामांकन पत्र कभी नहीं भरता है।

निर्विरोध पंचायत चुनने पर सरकार से मिलता है भारी भरकम इनाम

इस अनोखे और शांतिपूर्ण सिस्टम के कारण ग्रामीण हमेशा निर्विरोध पंचायत चुनते हैं। पिछली बार पर्ची सिस्टम से लोगों ने पार्वती शर्मा को प्रधान चुना था। निर्विरोध पंचायत चुनने पर राज्य सरकार ने दस लाख रुपये का भारी इनाम दिया था। इस बार भी ग्रामीणों ने यही पर्ची वाला नियम सख्ती से लागू किया है। सरकार ने स्पष्ट घोषणा की है कि निर्विरोध पंचायत चुनने पर विकास कार्यों के लिए पच्चीस लाख रुपये की बड़ी राशि पंचायत को देंगे।

चुनाव का पैसा बचाकर प्रतिनिधियों ने गांव के विकास में लगाया

चुनाव प्रचार बंद होने से उम्मीदवारों के लाखों रुपये बच जाते हैं। पिछली बार चुनाव खर्च का पैसा बचाकर सभी प्रतिनिधियों ने गांव के विकास के लिए दान कर दिया था। प्रधान ने चार लाख और उप प्रधान ने दो लाख रुपये दिए थे। बीडीसी सदस्य ने एक लाख और अन्य सदस्यों ने पचास-पचास हजार रुपये दान किए थे। इस जमा राशि से ग्रामीणों ने गांव में एक बड़ा सामुदायिक भवन और कई शानदार विकास कार्य पूरी तरह संपन्न कराए हैं।

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