हिमाचल निकाय चुनाव: 1426 उम्मीदवारों ने ठोकी ताल, आशा वर्कर्स पर लगा बैन, जानें अहम बातें

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में नगर निकाय चुनावों का बिगुल बज चुका है। राज्य में नामांकन प्रक्रिया शनिवार को शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हो गई। तीन दिन तक चली इस अहम प्रक्रिया में कुल 1426 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि मतदान 17 मई को ईवीएम के जरिए होगा। इस बार कांगड़ा से सबसे ज्यादा उम्मीदवारों ने अपना दम दिखाया है। वहीं, आशा वर्कर्स के चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाई गई है।

कांगड़ा में सबसे अधिक और हमीरपुर में सबसे कम नामांकन

आयोग के अनुसार नामांकन प्रक्रिया 29 अप्रैल, 30 अप्रैल और 2 मई को संपन्न हुई। अंतिम दिन पूरे राज्य से 721 उम्मीदवारों ने पर्चे भरे। कांगड़ा में सबसे अधिक 269 लोगों ने नामांकन दाखिल किया है। हमीरपुर जिले में सबसे कम 55 नामांकन प्राप्त हुए हैं। मंडी से 214, शिमला से 167 और सोलन से 158 उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी पेश की है। अन्य सभी जिलों में चुनाव को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।

ईवीएम से डाले जाएंगे वोट, चार मई को होगी छंटनी

नगर निकाय चुनाव पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के माध्यम से संपन्न होंगे। मतदान 17 मई को सुबह सात बजे से दोपहर तीन बजे तक करवाया जाएगा। इससे पहले चार मई को सुबह दस बजे अधिकारी नामांकन पत्रों की जांच करेंगे। उम्मीदवार चार मई तक ही अपना नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद प्रत्याशियों को तुरंत चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए जाएंगे। प्रशासन ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए अपनी सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

चुनाव विभाग के कर्मचारियों की नहीं लगेगी कोई ड्यूटी

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने उपायुक्तों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। पंचायत और शहरी निकाय चुनावों में चुनाव विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी नहीं लगेगी। विभाग के कर्मचारी पहले से ही मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण कार्यों में व्यस्त हैं। निर्वाचन आयोग के पुराने आदेशों का हवाला देते हुए यह फैसला लिया गया है। अधिकारियों को वार्ड परिसीमन और मतदाता सूची का काम अन्य सरकारी कर्मचारियों को सौंपने के लिए स्पष्ट रूप से कहा गया है।

आशा कार्यकर्ताओं के चुनाव लड़ने पर लगाई गई पाबंदी

पंचायती राज विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए आशा कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया है। पंचायती राज अधिनियम 1994 के तहत सरकारी उपक्रमों में काम करने वाले लोग चुनाव नहीं लड़ सकते। आशा कार्यकर्ताओं को काम के बदले हर महीने मानदेय और प्रोत्साहन राशि मिलती है। इसी वजह से उन्हें भी सरकारी सेवा के दायरे में माना गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को भेजे गए पत्र में विभाग ने इसे पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।

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