Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नई डिटेंशन पॉलिसी लागू होते ही बड़ा झटका लगा है। हाल ही में पांचवीं और आठवीं कक्षा के चौंकाने वाले परीक्षा परिणाम सामने आए हैं। मार्च में हुई परीक्षाओं में पूरे प्रदेश में कुल 1362 छात्र फेल हो गए हैं। शिक्षा विभाग ने अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम को सख्ती से लागू कर दिया है। अब बिना न्यूनतम अंक प्राप्त किए किसी भी छात्र को अगली कक्षा में प्रमोट नहीं किया जाएगा।
आठवीं कक्षा के छात्रों का प्रदर्शन रहा सबसे ज्यादा खराब
परीक्षा परिणामों में सबसे बुरी स्थिति आठवीं कक्षा की देखने को मिली है। प्रदेश में आठवीं के कुल 1032 छात्र डिटेन किए गए हैं। इन छात्रों का गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे मुख्य विषयों में प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। दूसरी तरफ पांचवीं कक्षा में कुल 330 बच्चे फेल हुए हैं। जिलेवार बात करें तो सोलन में 442 और सिरमौर में 350 बच्चे परीक्षा पास नहीं कर सके। कुल्लू और ऊना जिलों में भी छात्रों का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा।
बुनियादी शिक्षा की कमजोरी ने बढ़ाई शिक्षा विभाग की चिंता
पांचवीं कक्षा में अंग्रेजी, गणित, हिंदी और ईवीएस में लगभग बराबर संख्या में छात्र फेल हुए हैं। यह आंकड़े प्रदेश में बुनियादी शिक्षा की कमजोरी को साफ दर्शाते हैं। आठवीं कक्षा में सबसे अधिक 949 बच्चे गणित में फेल हुए हैं। इसके बाद अंग्रेजी में 900 बच्चे डिटेन हुए हैं। विज्ञान में 820 और हिंदी में 725 बच्चे पिछड़ गए हैं। कांगड़ा, हमीरपुर और बिलासपुर जिलों में भी छात्रों की स्थिति बहुत ही ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है।
फेल हुए छात्रों को परीक्षा पास करने का मिलेगा एक और मौका
शिक्षा विभाग ने फेल हुए इन सभी छात्रों को एक और मौका देने का फैसला लिया है। अब दो महीने के बाद इन विद्यार्थियों की दोबारा से परीक्षा ली जाएगी। इस नई परीक्षा में पास होने पर ही उन्हें अगली कक्षा में भेजा जाएगा। अगर ये छात्र दोबारा परीक्षा पास करने में असफल रहते हैं, तो उन्हें पुरानी कक्षा में ही रखा जाएगा। हिमाचल सरकार ने बीते शैक्षणिक सत्र से केंद्र सरकार के नियमों को पूरी तरह लागू किया है।
राज्य में पूरी तरह से बंद हुई नो डिटेंशन पॉलिसी
राज्य में पहले पांचवीं और आठवीं कक्षा में विद्यार्थियों को बिना पास हुए अगली कक्षा में भेज दिया जाता था। इस पुरानी व्यवस्था को नो डिटेंशन पॉलिसी कहा जाता था। अब राज्य सरकार ने इस पुरानी नीति को हमेशा के लिए बंद कर दिया है। छात्रों को अब अगली कक्षा में जाने के लिए न्यूनतम अंक प्राप्त करने ही होंगे। किन्नौर और लाहौल-स्पीति को छोड़कर बाकी दस जिलों के ग्रीष्मकालीन स्कूलों में यह वार्षिक परीक्षाएं हाल ही में आयोजित हुई थीं।
जिलों के अनुसार फेल होने वाले छात्रों के प्रमुख आंकड़े
परीक्षा के इन आंकड़ों ने कई जिलों की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य विषयों में छात्रों का फेल होना बहुत ही निराशाजनक है।
- सिरमौर जिले में आठवीं के 354 छात्र गणित में फेल हुए।
- सोलन जिले में आठवीं के 219 छात्र अंग्रेजी में लटके।
- कुल्लू में आठवीं के 140 विद्यार्थी अंग्रेजी में पास नहीं हुए।
- ऊना में भी 104 छात्र आठवीं कक्षा के गणित में फेल हुए।


