शिमला में 1.13 करोड़ का जल घोटाला: स्कूटर-कारों से ढोया पानी, विजिलेंस ने 9 पर कसा शिकंजा

Himachal News: शिमला में हैरान करने वाला एक बड़ा जल आपूर्ति घोटाला उजागर हुआ है। ठियोग उपमंडल में पानी के नाम पर 1.13 करोड़ रुपये का भारी फर्जीवाड़ा हुआ है। विजिलेंस विभाग ने मामले की जांच पूरी कर ली है। अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों समेत नौ लोगों के खिलाफ अदालत में चालान पेश कर दिया गया है। पिछले साल जल संकट के दौरान यह गड़बड़ी हुई थी। विजिलेंस की सख्त कार्रवाई से प्रशासन में भारी हड़कंप मच गया है।

मोटरसाइकिल और कारों के नंबरों पर ढोया गया पानी

विजिलेंस की जांच में बहुत ही चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पानी की सप्लाई के लिए रिकॉर्ड में जिन बड़े टैंकरों को दिखाया गया था, असल में वे फर्जी थे। रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि दर्ज किए गए नंबर स्कूटर, मोटरसाइकिल और कारों के हैं। भ्रष्टाचारियों ने इन छोटे वाहनों के नंबरों पर पानी के फर्जी बिल पास करवा लिए। सड़क विहीन गांवों में भी टैंकरों से पानी पहुंचाने के बिल बनाए गए।

बिना टेंडर दिए ठेकेदारों ने नालों का गंदा पानी पिलाया

जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इस काम के लिए कोई भी टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई थी। अधिकारियों ने अपने पसंदीदा ठेकेदारों को पानी ढुलाई का करोड़ों का काम सौंप दिया। टेंडर की शर्तों के अनुसार लेलू पुल से साफ पानी भरना था। लेकिन ठेकेदारों ने पैसे बचाने के लिए सीधे नालों से गंदा पानी भरकर लोगों को सप्लाई कर दिया। जनता के स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ किया गया और खजाने को नुकसान पहुंचाया।

एसडीएम कार्यालय से बिना जांच के पास हुए फर्जी बिल

विजिलेंस ने जल शक्ति विभाग के जूनियर इंजीनियर और लिपिक सहित कई बड़े अधिकारियों को मुख्य आरोपी बनाया है। जूनियर इंजीनियर ने बिना जमीनी जांच के फर्जी बिल तैयार किए। फिर कार्यकारी अभियंता ने इन बिलों को आसानी से आगे बढ़ा दिया। अंत में एसडीएम कार्यालय ने बिना भौतिक सत्यापन के ही सारा भुगतान जारी कर दिया। विजिलेंस ने इस भ्रष्टाचार मामले में अब तक करीब एक सौ बीस लोगों के आधिकारिक बयान दर्ज कर लिए हैं।

आरटीआई से हुआ था घोटाले का पर्दाफाश, 10 अधिकारी हो चुके हैं निलंबित

इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश ठियोग के पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने आरटीआई के माध्यम से किया था। आरटीआई के दस्तावेजों ने प्रशासन की पूरी पोल खोल दी थी। इसके बाद ही प्रदेश सरकार ने विजिलेंस से निष्पक्ष जांच के सख्त आदेश दिए थे। प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी मिलने के बाद सरकार ने दस अधिकारियों को तुरंत निलंबित कर दिया था। इसके अलावा घोटाले में शामिल भ्रष्ट ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने के सख्त आदेश भी जारी किए गए हैं।

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