हिमाचल नगर निगम चुनाव: मेयर आरक्षण पर सस्पेंस खत्म होने के करीब, 5 साल के कार्यकाल ने बढ़ाई धड़कनें

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के नगर निगम चुनावों में मेयर पद के आरक्षण का सस्पेंस जल्द खत्म होगा। शहरी विकास विभाग ने नया प्रस्ताव तैयार किया है। राज्य सरकार ने यह अहम प्रस्ताव विधि विभाग को भेज दिया है। अगले हफ्ते तक आरक्षण रोस्टर पर अंतिम फैसला आ जाएगा। इसके बाद ही मेयर पदों की स्पष्ट श्रेणी तय हो सकेगी। सरकार ने हाल ही में मेयर का कार्यकाल बढ़ाकर पांच साल कर दिया है।

पांच साल के नए कार्यकाल ने बढ़ाई उम्मीदवारों की उलझन

पालमपुर, धर्मशाला, मंडी और सोलन नगर निगमों में इस बार मेयर पूरे पांच साल तक काम करेंगे। वर्तमान में नगर निकाय चुनावों के लिए नामांकन की प्रकिया बहुत तेजी से चल रही है। लेकिन मेयर पद का आरक्षण रोस्टर अभी तक घोषित नहीं हुआ है। इस कारण सभी चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों में भारी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। रोस्टर जारी न होने से उम्मीदवार अपनी जीत का सही गणित नहीं लगा पा रहे हैं।

पार्षद ही चुनेंगे नगर निगम का नया मेयर

हिमाचल प्रदेश में मेयर के सीधे चुनाव की कोई व्यवस्था नहीं है। जनता सिर्फ अपने वार्ड के पार्षदों को वोट देकर चुनती है। चुनाव जीतने के बाद ये पार्षद आपस में मिलकर नए मेयर का चुनाव करते हैं। निर्वाचन कार्यक्रम के तहत छह मई को नाम वापसी की अंतिम तारीख है। इसी दिन सभी उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न भी बांटे जाएंगे। मतदान सत्रह मई को होगा और इकतीस मई को चुनाव परिणाम घोषित होंगे।

विधि विभाग की राय के बाद जारी होगा अंतिम रोस्टर

शहरी विकास विभाग के निदेशक डॉक्टर नीरज कुमार ने इस मुद्दे पर अहम जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि पहले मेयर का कार्यकाल केवल ढाई साल का होता था। अब सरकार ने इसे बढ़ाकर पूरे पांच साल कर दिया है। कार्यकाल में इस बड़े बदलाव के कारण ही आरक्षण रोस्टर पर कानूनी राय मांगी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले एक हफ्ते के भीतर ही अंतिम रोस्टर पूरी तरह जारी होगा।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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