यमुना किनारे 310 परिवारों पर मंडराया बेदखली का साया, DDMA के नोटिस से सदियों पुरानी ‘पुरोहित संस्कृति’ खतरे में

Delhi News: राजधानी के कश्मीरी गेट स्थित यमुना बाजार में रहने वाले 310 परिवारों की रातों की नींद उड़ गई है। दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने निगम बोध घाट के पास बसी इस बस्ती को खाली करने का फरमान जारी किया है। नोटिस में निवासियों को अपना बोरिया-बिस्तर समेटने के लिए मात्र 15 दिन का समय दिया गया है। समय सीमा खत्म होने पर प्राधिकरण ने ध्वस्तीकरण अभियान चलाने की कड़ी चेतावनी दी है। इस फैसले से सदियों से यहां रह रहे पुरोहित परिवारों में भारी रोष और अनिश्चितता का माहौल है।

पुश्तैनी पहचान और विरासत पर संकट

बेदखली के इस नोटिस ने यमुना किनारे विकसित हुई एक पूरी संस्कृति को लुप्त होने की कगार पर खड़ा कर दिया है। यहां रहने वाले सुनील शर्मा बताते हैं कि उनका परिवार लगभग 200 वर्षों से इस घाट पर कर्मकांड करा रहा है। उनके पास एक शताब्दी से भी अधिक पुराने नक्शे और अभिलेख मौजूद हैं। स्थानीय निवासियों का तर्क है कि उनका जीवन पूरी तरह यमुना और घाटों की परंपरा से जुड़ा है। वे पीढ़ियों से यहां आरती और अंतिम संस्कार जैसे धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराते आए हैं।

सरकार का तर्क: डूब क्षेत्र और अवैध कब्जा

दूसरी ओर, प्रशासन इस बेदखली को सुरक्षा की दृष्टि से अनिवार्य बता रहा है। सरकार का कहना है कि यमुना बाजार दिल्ली का सबसे निचला इलाका है, जो मानसून के दौरान सबसे पहले डूबता है। अधिकारियों के मुताबिक, डीडीए की जमीन पर किया गया यह अतिक्रमण अवैध है। पिछले दो सालों में यमुना का जलस्तर जिस तरह बढ़ा है, उससे यहां जान-माल का खतरा बना रहता है। हालांकि, निवासी इसे अपनी पुश्तैनी विरासत बताकर बेदखली का कड़ा विरोध कर रहे हैं।

मुगल काल से जुड़ा है इस बस्ती का इतिहास

यमुना घाट पंडा एसोसिएशन के अनुसार, कम से कम 60 परिवार ऐसे हैं जिनका इतिहास 100 साल से भी अधिक पुराना है। स्थानीय निवासी सुरेंद्र का दावा है कि उनके पूर्वज राजा अकबर के समय से यहां रह रहे हैं। इतिहासकार स्वप्ना लिडल भी इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व की पुष्टि करती हैं। निगमबोध घाट के पास स्थित प्राचीन नीली छतरी मंदिर के आसपास मानवीय गतिविधियों के प्रमाण मुगल काल से मिलते हैं। परिवारों का कहना है कि 15 दिन में स्कूल जाने वाले बच्चों और पुरोहितों का विस्थापन नामुमकिन है।

पुनर्वास की मांग और उपराज्यपाल से गुहार

15 दिनों की अल्टीमेटम अवधि में घर खाली करने की चुनौती ने लोगों को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया है। 78 वर्षीय भारत लाल शर्मा ने सरकार से बेहतर पुनर्वास की मांग की है। स्थानीय निवासी अब अपने विधायक परमजीत सैनी के नेतृत्व में उपराज्यपाल (LG) से मुलाकात करेंगे। वे अपनी चिंताओं और ऐतिहासिक प्रमाणों को प्रशासन के सामने रखेंगे। निवासियों का मानना है कि उन्हें हटाने से पहले सरकार को यमुना की सफाई और पुनरुद्धार पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

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