Tamil Nadu News: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों ने अभिनेता विजय की पार्टी ‘तमिलागा वेट्री कझगम’ (TVK) को राज्य की राजनीति में एक बड़ी शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया है। अपनी पहली ही चुनावी जंग में विजय की पार्टी ने 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया है। हालांकि, वह बहुमत के जादुई आंकड़े 118 से मात्र 10 सीटें पीछे रह गए। चुनावी डेटा के गहन विश्लेषण से पता चलता है कि किसी विपक्षी दल ने नहीं, बल्कि मात्र 7,974 वोटों के मामूली अंतर ने विजय को सत्ता की दहलीज पर रोक दिया।
इन 10 सीटों पर रहा हार का ‘खूनी’ फासला
तमिलनाडु की सियासत में इस बार मुकाबला इतना कड़ा था कि 10 अहम सीटों पर हार-जीत का फैसला बहुत मामूली अंतर से हुआ। अगर इन 10 सीटों पर TVK के पक्ष में केवल 7,974 वोट और पड़ते, तो विजय आज बिना किसी बैसाखी के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे होते। तिरुक्कोयिलूर सीट पर TVK उम्मीदवार मात्र 285 वोटों से हार गए। वहीं, कुलितलाई में डीएमके प्रत्याशी ने विजय के सिपाही को सिर्फ 579 वोटों के अंतर से शिकस्त दी।
22 सीटों पर दिखा कड़ा मुकाबला और 1 वोट की ऐतिहासिक जीत
चुनावी संघर्ष की यह कहानी केवल 10 सीटों तक सीमित नहीं है। राज्य की लगभग 22 सीटों पर फासला इतना कम था कि इसने उम्मीदवारों की धड़कनें बढ़ा दी थीं। पलानी, कोविलपट्टी और डिंडीगुल जैसी सीटों पर हार का अंतर 600 से 1500 वोटों के बीच सिमट गया। कोयंबटूर साउथ और तिरुवन्नामलाई जैसी हाई-प्रोफाइल सीटों पर भी TVK उम्मीदवार 2,000 से 3,000 वोटों से पिछड़ गए। दिलचस्प बात यह है कि एक सीट पर TVK ने महज 1 वोट के अंतर से ऐतिहासिक जीत भी दर्ज की है।
TVK की राह में प्रतिद्वंद्वियों से बड़ा रोड़ा बना ‘नोटा’
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘नोटा’ (None of the Above) ने विजय जोसेफ की सत्ता की राह में सबसे बड़ी बाधा उत्पन्न की। कई सीटों पर हार का मार्जिन नोटा को मिले कुल वोटों से भी कम रहा। तिरुक्कोयिलूर में हार का अंतर 385 था, जबकि नोटा को 500 वोट मिले। इसी तरह पलानी में हार 693 वोटों से हुई, जबकि 750 लोगों ने नोटा का बटन दबाया। अगर ये मतदाता TVK पर भरोसा जताते, तो आज तमिलनाडु की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह अलग और एकतरफा होती।
बहुमत के करीब होकर भी राजभवन के चक्कर काट रहे विजय
बहुमत के आंकड़े से महज 10 कदम दूर रह जाने के कारण विजय को अब सरकार बनाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। वे दो बार राज्यपाल से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन स्पष्ट बहुमत न होने के कारण फिलहाल उनके हाथ खाली हैं। ये 7,974 वोट अब ‘थलापति’ विजय के लिए एक ऐसी टीस बन गए हैं, जिसने उन्हें सत्ता के शिखर तक पहुंचने से ऐन वक्त पर रोक दिया। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में तमिलनाडु की गठबंधन राजनीति क्या नया मोड़ लेती है।


