Himachal News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में नशे के बढ़ते जाल को जड़ से खत्म करने के लिए प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी रणनीति तैयार की है। उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में हुई ‘एनकॉर्ड’ की जिला स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब पुलिस के साथ-साथ राजस्व विभाग के पटवारी भी इस अभियान का मोर्चा संभालेंगे। पटवारियों को अपने क्षेत्रों में नशे के संदिग्ध कारोबारियों की पहचान कर उनकी रिपोर्ट सीधे एसडीएम को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
पटवारी खंगालेंगे तस्करों की संपत्तियों का ब्यौरा
नशे के खिलाफ इस जंग में पटवारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। चूंकि पटवारी गांव और जमीन के रिकॉर्ड के विशेषज्ञ होते हैं, इसलिए वे यह पता लगाएंगे कि नशा तस्करों ने इस अवैध धंधे से कितनी संपत्ति अर्जित की है। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि नशे की कमाई से बनाई गई संपत्तियों की गहन जांच होगी और उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए राजस्व विभाग, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
पंचायत चुनाव को देखते हुए अवैध शराब पर सख्ती
हिमाचल में आगामी पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों के मद्देनजर प्रशासन ने अवैध शराब की बिक्री और स्टॉकिंग पर विशेष नजर रखने को कहा है। उपायुक्त ने आबकारी विभाग को निर्देश दिए कि चुनाव के दौरान नशे का इस्तेमाल मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए न हो। इसके लिए विशेष निगरानी दल गठित किए गए हैं। प्रशासन का लक्ष्य चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह नशा मुक्त और पारदर्शी बनाना है। पंचायत चुनाव संपन्न होने तक नियमित समीक्षा बैठकें जारी रहेंगी।
स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता और मोबाइल ऐप का सहारा
प्रशासन का मानना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल कानून के भरोसे नहीं जीती जा सकती, इसमें सामाजिक भागीदारी अनिवार्य है। इसके लिए स्कूलों और कॉलेजों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। विद्यार्थियों को “ड्रग फ्री हिमाचल” मोबाइल ऐप के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। शिक्षण संस्थानों में होने वाली नशा विरोधी गतिविधियों का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करने के लिए खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
4 महीनों में 235 तस्कर गिरफ्तार, पुलिस का एक्शन मोड
शिमला के एसएसपी गौरव सिंह ने बैठक में बताया कि पुलिस एनडीपीएस मामलों में लगातार आक्रामक कार्रवाई कर रही है। इस साल के शुरुआती चार महीनों में ही 111 मामले दर्ज कर 235 नशा तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा गया है। सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए पुलिस ने पंजाब, हरियाणा, यूपी, बिहार और केरल सहित भारत-नेपाल सीमा तक छापेमारी की है। इन राज्यों से अब तक 30 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जो अंतर्राज्यीय नशा गिरोह का हिस्सा थे।
राजस्व विभाग की मदद से वित्तीय जांच में आएगी तेजी
एसएसपी ने स्वीकार किया कि नशे से जुड़े मामलों में वित्तीय जांच की गति फिलहाल थोड़ी धीमी है। हालांकि, पटवारियों और राजस्व विभाग की सक्रियता से इसमें तेजी आने की उम्मीद है। पुलिस अब उन 35 आदतन अपराधियों पर भी विशेष नजर रख रही है जिन्हें हाल ही में जेल भेजा गया है। पंचायत चुनावों के दौरान नशा कारोबारियों की हर गतिविधि को ट्रैक किया जाएगा। प्रशासन की इस संयुक्त घेराबंदी से तस्करों में हड़कंप मच गया है और सप्लाई नेटवर्क ध्वस्त होने की कगार पर है।


