Entertainment News: कपिल शर्मा और नीतू कपूर की नई फिल्म ‘दादी की शादी’ सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। यह फिल्म एक दिलचस्प पारिवारिक ड्रामा है, जो हास्य और भावनाओं का बेहतरीन मिश्रण पेश करती है। आशीष आर मोहन के निर्देशन में बनी यह फिल्म रिश्तों की जटिलताओं को बहुत ही खूबसूरती और सरलता से पर्दे पर उतारती है। फिल्म की शुरुआत भले ही हल्के-फुल्के अंदाज में होती है, लेकिन कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, यह दर्शकों को एक गहरे भावनात्मक सफर पर ले जाती है।
शादी के घर में दादी के फैसले ने मचाया हंगामा
कहानी की शुरुआत कपिल शर्मा के किरदार से होती है, जो अपनी अरेंज मैरिज की तैयारियों में डूबा हुआ है। उसका रिश्ता सादिया खातिब के साथ तय हुआ है और दोनों परिवार खुशियों में मगन हैं। तभी सादिया की दादी (नीतू कपूर) अचानक खुद शादी करने का फैसला कर सबको चौंका देती हैं। दादी के इस क्रांतिकारी कदम से परिवार के पारंपरिक ढांचे में हलचल मच जाती है। यहीं से फिल्म एक नई दिशा पकड़ती है और हास्य का सिलसिला शुरू होता है।
शिमला की वादियों में पीढ़ियों का टकराव
फिल्म की पटकथा दर्शकों को शिमला ले जाती है, जहां दादी अकेले जीवन व्यतीत करती हैं। जब उनके बच्चों को इस उम्र में मां के दोबारा विवाह की खबर मिलती है, तो वे घबराकर तुरंत शिमला पहुंचते हैं। शिमला में एक ही घर के भीतर पुरानी और नई पीढ़ी की सोच के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिलता है। निर्देशक ने इस तनावपूर्ण माहौल के बीच कई मजेदार और कुछ अत्यंत भावुक क्षणों को बहुत ही सलीके से बुना है।
प्यार और मिशन के बीच फंसे कपिल शर्मा
कपिल शर्मा का किरदार इस पूरे मामले में बुरी तरह उलझ जाता है। वह सादिया से बेहद प्यार करता है, लेकिन दादी का फैसला उसके अपने रिश्ते को प्रभावित करने लगता है। परिवार के दबाव में आकर कपिल अनचाहे मन से दादी की शादी रोकने के गुप्त मिशन में शामिल हो जाता है। इस दौरान कपिल की कॉमिक टाइमिंग कमाल की है। फिल्म यह संदेश देती है कि उम्र चाहे जो भी हो, हर इंसान को अपनी शर्तों पर जीने का पूरा हक है।
नीतू कपूर और सादिया खातिब का शानदार अभिनय
परफॉर्मेंस के मामले में नीतू कपूर ने दादी के किरदार में गजब का आत्मविश्वास भरा है। उन्होंने एक स्वतंत्र और भावुक बुजुर्ग महिला की भावनाओं को बखूबी व्यक्त किया है। कपिल शर्मा ने न केवल हंसाया है, बल्कि इमोशनल दृश्यों में भी अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया है। सादिया खातिब ने अपनी सादगी से फिल्म में ताजगी भरी है। फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर कहानी की गति के साथ पूरी तरह न्याय करता है और फिल्म को यादगार बनाता है।


