मुलायम सिंह के बेटे प्रतीक यादव पंचतत्व में विलीन: अखिलेश ने संभाली रोती हुई बेटियां, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई मौत की असली वजह

Uttar Pradesh News: समाजवादी पार्टी के संरक्षक दिवंगत मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का गुरुवार को लखनऊ में अंतिम संस्कार कर दिया गया। भैंसाकुंड घाट पर गमगीन माहौल के बीच वे पंचतत्व में विलीन हो गए। प्रतीक अपने पीछे पत्नी अपर्णा यादव और दो मासूम बेटियों को छोड़ गए हैं। इस दुखद घड़ी में पूरा यादव परिवार एक साथ नजर आया। राजनीति के दिग्गजों और भारी संख्या में समर्थकों ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब और भावुक दृश्य

प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा उनके निजी आवास से शुरू हुई। इसमें भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के कई कद्दावर नेता शामिल हुए। शिवपाल यादव के पुत्र आदित्य यादव ने प्रतीक की अर्थी को कंधा दिया। वहीं धर्मेंद्र यादव भी पूरी यात्रा के दौरान साथ चलते रहे। श्मशान घाट पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव प्रतीक की दोनों बेटियों को ढांढस बंधाते दिखे। यह भावुक दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं।

ससुर ने दी मुखाग्नि और दिग्गजों ने अर्पित की श्रद्धांजलि

अंतिम संस्कार की सबसे विशेष बात यह रही कि प्रतीक के ससुर अरविंद बिष्ट ने उन्हें मुखाग्नि दी। इससे पहले सांसद डिंपल यादव ने भी घर पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए थे। बैकुंठधाम में अखिलेश यादव के साथ शिवपाल यादव और आदित्य यादव मौजूद रहे। वहीं उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने भी श्मशान घाट पहुंचकर शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। राजनीतिक मतभेदों को किनारे रखकर सभी दलों के नेताओं ने परिवार का दुख साझा किया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट: आखिर कैसे हुई प्रतीक यादव की मौत?

प्रतीक यादव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का मुख्य कारण ‘पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म’ बताया गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार फेफड़ों की नस में खून का थक्का जमने से हृदय की गति रुक गई थी। रिपोर्ट में शरीर पर कुछ पुरानी चोटों और पैर के अंगूठे के नीला पड़ने का भी जिक्र है। डॉक्टरों ने अधिक स्पष्टता के लिए विसरा और हृदय के कुछ नमूनों को सुरक्षित रख लिया है। इन सैंपल्स की अब गहन रासायनिक जांच की जाएगी।

राजनीतिक और पारिवारिक विरासत का अंत

प्रतीक यादव की अचानक मौत से उत्तर प्रदेश की राजनीति और यादव कुनबे में गहरा शोक है। हालांकि वे सक्रिय राजनीति से दूर रहे, लेकिन अपर्णा यादव के भाजपा में होने के कारण वे हमेशा चर्चा में रहते थे। लखनऊ के भैंसाकुंड घाट पर हुआ यह अंतिम संस्कार परिवार की एकजुटता का गवाह बना। समर्थकों ने ‘प्रतीक यादव अमर रहें’ के नारे लगाकर अपने नेता के बेटे को अंतिम विदाई दी। अब सबकी निगाहें विसरा रिपोर्ट के परिणामों पर टिकी हैं।

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