New Delhi News: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को ब्रिक्स 2026 की महत्वपूर्ण बैठक का आगाज किया। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में उन्होंने वैश्विक अनिश्चितता के बीच एक नई उम्मीद जगाई है। जयशंकर ने कहा कि मौजूदा दौर में दुनिया तेजी से बदल रही है। ऐसे कठिन समय में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की नजरें ब्रिक्स की ओर टिकी हैं। भारत इस संगठन को एक स्थिरता देने वाली ताकत के रूप में वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
वैश्विक संघर्षों के बीच कूटनीति पर भारत का जोर
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवाद और कूटनीति ही किसी भी वैश्विक संघर्ष का एकमात्र समाधान है। जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ साझा सहयोग को ब्रिक्स देशों की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि बातचीत के माध्यम से ही दुनिया में स्थिरता लाई जा सकती है। हाल के संघर्षों ने यह साबित कर दिया है कि युद्ध किसी भी देश के हित में नहीं है और बातचीत का महत्व बढ़ गया है।
आर्थिक झटकों से निपटने के लिए सुरक्षित सप्लाई चेन
जयशंकर ने विकासशील देशों की आर्थिक चिंताओं को स्वर देते हुए एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक विकास को बनाए रखने के लिए बाजारों का विविधीकरण अनिवार्य है। भरोसेमंद सप्लाई चेन के बिना दुनिया को बड़े आर्थिक झटकों से बचाना मुमकिन नहीं होगा। खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और उर्वरकों की उपलब्धता आज भी कई देशों के लिए बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। ब्रिक्स इन समस्याओं के समाधान के लिए एक ठोस वैश्विक मंच प्रदान कर सकता है।
जलवायु परिवर्तन और तकनीक पर साझा जिम्मेदारी
जलवायु परिवर्तन पर चर्चा करते हुए जयशंकर ने ‘साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों’ के सिद्धांत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति का उपयोग केवल अमीरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। नई तकनीकें आज शासन और अर्थव्यवस्था के ढांचे को पूरी तरह बदल रही हैं। हमें इनका इस्तेमाल समावेशी विकास के लिए करना होगा। तकनीक और पर्यावरण के मुद्दों पर समानता का सम्मान होना चाहिए। तभी विकासशील देश भी वैश्विक शासन प्रणाली में अपनी भागीदारी मजबूती से सुनिश्चित कर पाएंगे।
चौथी बार भारत के हाथों में ब्रिक्स की कमान
भारत ने इस साल 1 जनवरी से चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली है। इससे पहले भारत साल 2012, 2016 और 2021 में भी इस संगठन का नेतृत्व कर चुका है। 14 और 15 मई तक चलने वाली इस बैठक में भू-राजनीतिक चुनौतियों पर गहन मंथन होगा। सदस्य देशों के बीच आर्थिक व्यवस्था और विकास से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बढ़ाने पर सहमति बनी है। भारत की अध्यक्षता को सभी सदस्य देशों का भरपूर समर्थन मिल रहा है, जो इसकी सफलता का प्रमाण है।

