Science News: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चेयरमैन वी नारायणन ने शनिवार 18 अप्रैल 2026 को बड़ी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि G20 सैटेलाइट के 2027 में लॉन्च होने की उम्मीद है। यह उपग्रह जलवायु, वायु प्रदूषण और मौसम की निगरानी के लिए बनाया जा रहा है। नारायणन ने यह भी कहा कि भारत ने एक ही रॉकेट से 104 सैटेलाइट लॉन्च करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया है। ISRO अब 2040 तक इंसान को चांद पर भेजने की दिशा में काम कर रहा है। इसके अलावा डीप ओशन मिशन ‘समुद्रयान’ के लिए टाइटेनियम पोत भी बनाया जा रहा है।
भारत की अगुवाई में बनेगा G20 सैटेलाइट, 2027 में होगा लॉन्च
वी नारायणन ने ‘इंजीनियरिंग स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया’ में वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि ISRO फिलहाल G20 देशों के लिए एक साझा सैटेलाइट पर काम कर रहा है। इस परियोजना में भारत मुख्य भूमिका निभा रहा है। इस उपग्रह का मिशन जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और मौसम के पैटर्न पर शोध करना है। इससे पर्यावरणीय आंकड़ों की निगरानी की जा सकेगी। साथ ही वायुमंडलीय संरचना और आपदा प्रबंधन के लिए अहम जानकारी मिलेगी। यह सहयोग वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं का प्रमाण है। नारायणन ने कहा कि इस सैटेलाइट का प्रक्षेपण 2027 तक कर लिया जाएगा।
एक रॉकेट से 104 सैटेलाइट लॉन्च करने वाला भारत पहला देश
ISRO चेयरमैन ने भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत पहला ऐसा देश है, जिसने बिना किसी टक्कर के एक ही रॉकेट से 100 से अधिक उपग्रह स्थापित किए हैं। भारत ने 104 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। नारायणन ने बताया कि अब तक कई वाणिज्यिक मिशन पूरे किए जा चुके हैं। इनमें 34 देशों के 433 सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग शामिल है। भारत से लॉन्च किया गया सबसे भारी सैटेलाइट भी एक वाणिज्यिक उपग्रह ही था। यह उपलब्धियां बताती हैं कि वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत एक भरोसेमंद और सस्ता विकल्प बन चुका है। कम लागत और तकनीकी सटीकता के दम पर ISRO ने दुनिया का ध्यान खींचा है।
2040 तक इंसान को चांद पर भेजेगा ISRO, समुद्रयान के लिए बनेगा टाइटेनियम पोत
वी नारायणन ने भविष्य की योजनाओं का भी खुलासा किया। उन्होंने कहा कि ISRO 2040 तक इंसान को चांद पर भेजने की दिशा में काम कर रहा है। यह लक्ष्य हासिल हो जाता है तो भारत लॉन्चर टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट टेक्नोलॉजी और ह्यूमन स्पेस फ्लाइट में दुनिया के अग्रणी अंतरिक्ष देशों के बराबर होगा। नारायणन ने कहा, ‘हम विकसित भारत 2047 की दिशा में काम कर रहे हैं।’ इसके अलावा ISRO डीप ओशन मिशन ‘समुद्रयान’ के लिए 2.2 मीटर व्यास और 100 मिलीमीटर मोटाई का टाइटेनियम पोत बनाने की प्रक्रिया में है। यह पोत गहरे समुद्र में अनुसंधान के लिए उपयोग होगा। ये दोनों मिशन भारत को समुद्र और अंतरिक्ष दोनों में सुपरपावर बनाने की दिशा में अहम कदम हैं।
