India News: मोदी सरकार ने भारतीय समुद्री व्यापार और जहाजों की सुरक्षा को लेकर ऐतिहासिक फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने 12,980 करोड़ रुपये की सॉवरेन गारंटी के साथ स्वदेशी ‘भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस कोष’ (BMI कोष) के गठन को मंजूरी दे दी है। इस योजना से अब क्रूड ऑयल और अन्य जरूरी सामान ले जाने वाले जहाजों को अस्थिर समुद्री रास्तों पर भी बीमा की कमी नहीं खलेगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट बैठक के बाद यह जानकारी दी। यह कोष भारतीय व्यापारिक बेड़े के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा।
क्या है भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस कोष? जानिए इसका उद्देश्य
भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस कोष एक घरेलू समुद्री बीमा योजना है। इसे विशेष रूप से भारतीय ध्वज वाले, भारतीय नियंत्रण वाले या भारत के बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों के लिए बनाया गया है। यह कोष समुद्र में होने वाले सभी प्रकार के जोखिमों (जैसे युद्ध, आतंकवाद, समुद्री डकैती, प्राकृतिक आपदा) से सुरक्षा प्रदान करेगा। अक्सर देखा गया है कि अस्थिर समुद्री गलियारों से गुजरने वाले जहाजों को अंतरराष्ट्रीय बीमा कवर मिलने में दिक्कत आती है या बहुत महंगा पड़ता है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय बंदरगाहों तक माल ले जाने वाले जहाजों को सस्ती और निर्बाध बीमा सुविधा मिलती रहे, ताकि क्रूड ऑयल जैसी जरूरी चीजों का आयात-निर्यात सुरक्षित रहे।
12,980 करोड़ की सॉवरेन गारंटी, अब बीमा कंपनियों को नहीं होगी चिंता
इस कोष को पूरी तरह विश्वसनीय बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 12,980 करोड़ रुपये की सॉवरेन गारंटी दी है। इसका मतलब है कि इस बीमा योजना को सीधे भारत सरकार का वित्तीय समर्थन और गारंटी प्राप्त है। अगर किसी कारण से कोई बीमा कंपनी दावा नहीं चुका पाती, तो सरकार खुद हस्तक्षेप करेगी। यह गारंटी विदेशी बीमा कंपनियों के सामने एक मजबूत भरोसे के तौर पर काम करेगी। पहले भारतीय जहाजों को अंतरराष्ट्रीय बीमा बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता था, जहां भू-राजनीतिक तनाव के समय उन्हें मना कर दिया जाता था या काफी ज्यादा प्रीमियम देना पड़ता था। अब यह समस्या खत्म हो जाएगी।
बीमा पॉलिसियां कौन जारी करेगा? जानिए कोष की कार्यप्रणाली
इस BMI कोष के तहत बीमा पॉलिसियां सीधे सरकार जारी नहीं करेगी, बल्कि वे बीमा कंपनियां जारी करेंगी जो इस कोष की आधिकारिक सदस्य होंगी। कोष की संयुक्त अंडरराइटिंग क्षमता का उपयोग बीमा कवर प्रदान करने में किया जाएगा। सरकार के अनुसार, इस कोष की संयुक्त अंडरराइटिंग क्षमता लगभग 950 करोड़ रुपये होगी। यह राशि भारतीय व्यापारिक जहाजों के लिए एक बड़ा और सुरक्षित आधार प्रदान करेगी। अब भारतीय शिपिंग कंपनियां बिना किसी झिझक के खतरनाक समुद्री रास्तों पर भी अपने जहाज भेज सकेंगी। इससे देश का व्यापार निरंतर बना रहेगा और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। यह कदम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि है।
