कंगना रनौत की संसद में एक और बड़ी चूक! अपने ही क्षेत्र की जानकारी नहीं, सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मंडी से सांसद कंगना रनौत एक बार फिर भारी विवादों में घिर गई हैं। लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान उन्होंने एक बड़ी तथ्यात्मक गलती कर दी। उन्होंने दावा किया कि अड़सठ सदस्यों वाली राज्य विधानसभा में केवल एक महिला विधायक है। इस गलत बयान के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें जमकर ट्रोल किया जा रहा है। लोग एक सांसद की राजनीतिक समझ और उनके सामान्य ज्ञान पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

सच्चाई से कोसों दूर सांसद कंगना रनौत का दावा

कंगना का यह दावा पूरी तरह से गलत है। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश विधानसभा में तीन महिला विधायक मौजूद हैं। इनमें रीना कश्यप, अनुराधा राणा और कमलेश ठाकुर शामिल हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि रीना कश्यप खुद कंगना की ही पार्टी की तेजतर्रार नेता हैं। वहीं अनुराधा राणा उनके अपने मंडी लोकसभा क्षेत्र के लाहौल-स्पीति से विधायक चुनी गई हैं। कमलेश ठाकुर राज्य के मुख्यमंत्री की पत्नी हैं जो हाल ही में उपचुनाव जीतकर आई हैं।

अपनी ही पार्टी और क्षेत्र के नेताओं को भूलीं सांसद

इस बयान ने कंगना की अपने ही राज्य की राजनीति पर ढीली पकड़ को सबके सामने उजागर कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर घोर आश्चर्य जता रहे हैं। उनका मानना है कि संसद जैसे सर्वोच्च मंच पर पूरी तैयारी के साथ बोलना चाहिए। ऐसे बयान सीधे देश की जनता तक एक गलत संदेश भेजते हैं। सांसद को कम से कम अपनी पार्टी और अपने संसदीय क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की बुनियादी जानकारी तो होनी ही चाहिए।

पुराने बयानों को लेकर भी विवादों में रही हैं कंगना

यह पहला मौका नहीं है जब कंगना ने तथ्यों को लेकर ऐसी बड़ी चूक की हो। कुछ समय पहले एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने रामनाथ कोविंद को देश का पहला दलित राष्ट्रपति बता दिया था। जबकि यह ऐतिहासिक सम्मान के आर नारायणन को प्राप्त है। उस समय भी एंकर ने उन्हें बीच कार्यक्रम में टोक कर गलती सुधारी थी। अब लोकसभा में पूरे आत्मविश्वास के साथ गलत तथ्य पेश करने पर लोग उन पर कड़े सवाल दाग रहे हैं।

जनप्रतिनिधियों की तैयारी पर छिड़ी एक नई राष्ट्रव्यापी बहस

इस ताजा मामले ने देश भर में एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। लोग सोशल मीडिया पर लगातार लिख रहे हैं कि बिना पुख्ता जानकारी के संसद में बयानबाजी नहीं होनी चाहिए। जनता यह उम्मीद करती है कि उनके चुने हुए नेता जमीनी हकीकत से भलीभांति वाकिफ हों। कंगना का यह बयान अब सिर्फ एक साधारण गलती नहीं बल्कि राजनीतिक जागरूकता का बड़ा मुद्दा बन गया है। विपक्ष भी इस मुद्दे पर उन्हें घेर रहा है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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