Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश पुलिस की एसटीएफ ने नोएडा में मजदूरों के हिंसक प्रदर्शन मामले में बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस टीम ने हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद को तमिलनाडु राज्य से धर दबोचा है। इस पूरे मामले की जांच में कई बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस के अनुसार इस बड़ी हिंसा को अंजाम देने के लिए पूरी तरह से सुनियोजित तैयारी की गई थी। इसके लिए सोशल मीडिया का भरपूर इस्तेमाल किया गया था।
व्हाट्सऐप पर रची गई खौफनाक साजिश
जांच में सामने आया है कि हिंसा फैलाने के लिए अस्सी से अधिक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए गए थे। पुलिस उपायुक्त शैव्या गोयल ने इस पूरे नेटवर्क की चौंकाने वाली जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि मजदूरों के प्रदर्शन से पहले केवल तीन दिन के भीतर ये सभी ग्रुप तैयार किए गए थे। इनमें से करीब पचास ग्रुप्स का पुलिस अब तक पता लगा चुकी है। सत्रह ग्रुप्स का सत्यापन भी पूरा कर लिया गया है।
मजदूरों की मांग नहीं, भड़काने पर था जोर
पुलिस जांच में पता चला कि इन व्हाट्सऐप ग्रुप्स में मजदूरों की असली मांगों पर कोई चर्चा नहीं हो रही थी। वेतन बढ़ाने या काम करने की स्थिति सुधारने जैसी कोई बात इनमें शामिल नहीं थी। इसके बजाय कर्मचारियों को उकसाने और भीड़ जुटाने के भड़काऊ संदेश भेजे जा रहे थे। कारखानों में तोड़फोड़ करने की साजिश रची जा रही थी। यह सब पूरी तरह से एक सुनियोजित और खतरनाक तरीके से किया जा रहा था।
मजदूर बिगुल दस्ता और रूपेश राय गिरफ्तार
हिंसा भड़काने के लिए तीन दिन से कई स्तरों पर खतरनाक तैयारी चल रही थी। कुछ लोगों ने औद्योगिक इलाकों में घूमकर और सोशल मीडिया के जरिए पूरा माहौल तैयार किया। इस साजिश के पीछे मुख्य रूप से तीन संगठनों के नाम सामने आए हैं। इनमें ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। पुलिस ने इस संगठन के प्रमुख रूपेश राय समेत उन्नीस लोगों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है।
मानेसर हिंसा से भी जुड़े हैं संगठन के तार
नोएडा की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने बताया कि मामले की गहराई से जांच अभी जारी है। आने वाले दिनों में पुलिस कई और बड़ी गिरफ्तारियां कर सकती है। अधिकारियों के मुताबिक मजदूर बिगुल दस्ते के लोग औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों को खुलेआम भड़का रहे थे। इस संगठन का आपराधिक इतिहास पुराना है। इससे पहले हरियाणा के मानेसर में हुई भीषण औद्योगिक हिंसा में भी इसी संगठन का नाम प्रमुखता से सामने आया था।
फर्जी एक्स हैंडल और डिजिटल साक्ष्यों पर कार्रवाई
पुलिस अब डिजिटल और तकनीकी सबूतों के आधार पर इस पूरे खतरनाक नेटवर्क को ध्वस्त कर रही है। कई अन्य जांच एजेंसियां भी इस बड़े मामले की तहकीकात में जुट गई हैं। जांच के दौरान पुलिस टीम को पचास से अधिक संदिग्ध ‘एक्स’ (ट्विटर) हैंडल की अहम जानकारी मिली है। जांच में खुलासा हुआ है कि ये सभी फर्जी खाते हिंसा भड़कने से केवल एक या दो दिन पहले ही जानबूझकर बनाए गए थे।
