शिमला नगर निगम अधिकारी आत्महत्या मामला: सुसाइड नोट में मानसिक तनाव का जिक्र, परिजनों ने लगाया लॉबिंग का आरोप

Himachal News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में नगर निगम के लेखा अधिकारी रामेश्वर शर्मा की आत्महत्या के मामले में नया मोड़ आया है। पुलिस को तलाशी के दौरान मृतक के घर से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। इसमें उन्होंने अत्यधिक मानसिक तनाव का जिक्र किया है, हालांकि किसी विशेष व्यक्ति पर सीधे आरोप नहीं लगाए गए हैं। पुलिस ने सुसाइड नोट को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। परिजनों ने दफ्तर में चल रही गुटबाजी और लॉबिंग को मौत की वजह बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

देर रात तलाशी में मिला सुसाइड नोट

शिमला पुलिस ने शनिवार को बताया कि शुक्रवार देर रात घर की दोबारा तलाशी के दौरान यह सुसाइड नोट मिला। एसपी शिमला गौरव सिंह के अनुसार, रामेश्वर शर्मा ने नोट में मानसिक दबाव की बात लिखी है। उन्होंने किसी अधिकारी या सहकर्मी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आखिर वह मानसिक तनाव किस वजह से था। फॉरेंसिक टीम लिखावट और तथ्यों की बारीकी से पड़ताल कर रही है ताकि मौत के असल कारणों का पता चल सके।

परिजनों ने लगाया कार्यालय में लॉबिंग का आरोप

मृतक रामेश्वर शर्मा के साले कृष्ण शर्मा ने पुलिस के समक्ष गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि रामेश्वर अक्सर अपने परिवार और बच्चों से कार्यालय में होने वाली लॉबिंग को लेकर चर्चा करते थे। उनके भांजे ने भी दफ्तर में चल रही गुटबाजी की पुष्टि की है। परिजनों का दावा है कि सुसाइड नोट में भी दबी जुबान में ऐसी कुछ बातें लिखी गई हैं। वे इस मामले में उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं ताकि दोषियों का पता लग सके।

पत्नी से फोन पर बात के तुरंत बाद उठाया आत्मघाती कदम

घटना के दिन रामेश्वर शर्मा कार्यालय गए थे, लेकिन तय समय से पहले घर लौट आए। उनकी पत्नी एक रिश्तेदार की शादी में शामिल होने रोहड़ू गई थीं। फंदा लगाने से कुछ मिनट पहले ही रामेश्वर ने पत्नी को फोन कर उनकी लोकेशन पूछी थी। पत्नी ने बताया कि वे संजौली पहुंच चुके हैं और घर आने वाले हैं। इसके तुरंत बाद उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया। जब पत्नी और बेटा घर पहुंचे तो उन्होंने रामेश्वर को फंदे से लटका पाया और पुलिस को सूचित किया।

जूनियर इंजीनियर से वाहन को लेकर हुआ था विवाद

नगर निगम के भीतर चल रही गतिविधियों से जुड़ी कुछ और बातें भी सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले कार्यालय में आवंटित टैक्सी को लेकर रामेश्वर शर्मा का एक जूनियर इंजीनियर (JE) के साथ विवाद हुआ था। हालांकि, संयुक्त आयुक्त स्तर पर इस विवाद को सुलझा लिया गया था। पुलिस अब इस विवाद और दफ्तर के अन्य घटनाक्रमों को जोड़कर देख रही है। सहकर्मियों के अनुसार रामेश्वर एक बेहद शांत और जिम्मेदार अधिकारी थे, जो कभी दबाव में नहीं आते थे।

नगर निगम आयुक्त और मेयर ने जताया दुख

निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने रामेश्वर शर्मा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने रामेश्वर को एक बेहद अनुशासित और पेशेवर अधिकारी बताया। आयुक्त के अनुसार, वे कभी भी कर्मचारियों पर काम का बोझ नहीं डालते थे और कठिन परिस्थितियों में भी संयम से काम लेते थे। मेयर सुरेंद्र चौहान और आयुक्त शनिवार सुबह आईजीएमसी अस्पताल पहुंचे और पोस्टमार्टम के दौरान परिजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने परिजनों को आश्वासन दिया कि मामले की पूरी पारदर्शिता के साथ जांच करवाई जाएगी।

रोहड़ू के रहने वाले थे लेखा अधिकारी रामेश्वर

मूल रूप से रोहड़ू तहसील के रत्नाड़ी गांव के रहने वाले 45 वर्षीय रामेश्वर शर्मा शिमला के मेहली में रहते थे। वे पिछले काफी समय से नगर निगम में अपनी सेवाएं दे रहे थे। शनिवार को आईजीएमसी में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस अब उनके फोन रिकॉर्ड्स और कार्यालय के दस्तावेजों की जांच कर रही है। विभाग के अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि यह समझा जा सके कि पिछले कुछ दिनों में उनके व्यवहार में क्या बदलाव आए थे।

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