New Delhi News: भारत ने राजधानी नई दिल्ली में 10वें इंडियन ओशन डायलॉग (IOD-10) की सफल मेज़बानी करके वैश्विक कूटनीति में अपना दबदबा साबित कर दिया है। ‘बदलती दुनिया में भारतीय महासागर क्षेत्र’ थीम पर आधारित इस महासम्मेलन में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन मंथन हुआ। विदेश मंत्रालय ने इस महत्वपूर्ण संवाद का आयोजन इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स और आईओआरए सचिवालय के साथ मिलकर किया। इस आयोजन ने हिंद महासागर में भारत की बढ़ती भूमिका को वैश्विक स्तर पर रेखांकित किया है।
वैश्विक दिग्गजों का जमावड़ा और रणनीतिक सुरक्षा पर मंथन
इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में आईओआरए सदस्य देशों के वरिष्ठ अधिकारियों, अंतरराष्ट्रीय नीति निर्माताओं और प्रख्यात विद्वानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। बैठक के दौरान भारतीय महासागर क्षेत्र से जुड़े जटिल रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने माना कि हिंद महासागर का भविष्य वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत ने यहां अपनी मौजूदगी दर्ज कराकर यह स्पष्ट कर दिया कि क्षेत्र की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है।
वरिष्ठ मंत्रियों का संबोधन और सामूहिक विकास का संकल्प
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनेवाल ने भारत का पक्ष मजबूती से रखा। उनके साथ मॉरीशस के मंत्री धनंजय रामफल और यमन के राज्य मंत्री वलीद मोहम्मद अल कदीमी भी मंच पर मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने बदलते भू-राजनीतिक हालात में सामूहिक सुरक्षा और सतत विकास की आवश्यकता पर विशेष ज़ोर दिया। नेताओं ने माना कि सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने से ही क्षेत्र में शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
समुद्री सुरक्षा और ब्लू इकोनॉमी पर केंद्रित रही मुख्य चर्चा
इंडियन ओशन डायलॉग को आईओआरए का प्रमुख ट्रैक-1.5 मंच माना जाता है। यहां समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी, व्यापार और निवेश जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर नीति निर्माताओं ने खुलकर विचार साझा किए। भारत ने इससे पहले भी कई बार इस संवाद की सफल मेज़बानी की है। पहला सम्मेलन 2014 में केरल में हुआ था, जबकि छठा संस्करण 2019 में दिल्ली में आयोजित किया गया था। इस बार का संवाद भारत की 2025-27 की अध्यक्षता के कारण और भी महत्वपूर्ण है।
महासागर विजन और भविष्य की चुनौतियों से निपटने की तैयारी
भारत ने अपने ‘महासागर’ (MAHASAGAR) विजन के जरिए पड़ोसी पहले नीति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया है। समापन सत्र में मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने विशेष संबोधन दिया, जो क्षेत्रीय एकता का प्रतीक रहा। विदेश मंत्रालय के सचिव पी. कुमारन ने सम्मेलन के प्रमुख निष्कर्षों को दुनिया के सामने रखा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संवाद से निकले नतीजे आने वाले समय में हिंद महासागर की सुरक्षा और साझा समृद्धि के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।


