दुनिया में फिर पसरा एक और जानलेवा वायरस का खौफ, क्रूज पर मौत का तांडव, क्या भारत में भी मचाएगा तबाही?

New Delhi News: दुनियाभर में हंता वायरस के बढ़ते मामलों ने एक बार फिर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। डच क्रूज शिप ‘एमवी होंडियस’ पर इस खतरनाक वायरस के फैलने की खबर सामने आई है। इस घटना के बाद भारत सरकार का केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल और विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर स्थिति की लगातार और बारीकी से निगरानी कर रहा है।

भारतीय यात्रियों पर मंडराया खतरा और सरकार की तैयारी

इस वायरस के खतरे को देखते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों का जायजा लेने के लिए एक हाई-लेवल मीटिंग बुलाई गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के शीर्ष अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। डच क्रूज शिप पर दो भारतीय यात्री भी सवार हैं। इन दोनों नागरिकों को फिलहाल सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत कड़ी निगरानी में रखा गया है। राहत की बात केवल यह है कि अभी तक इनमें कोई भी लक्षण नहीं दिखे हैं।

आखिर क्या है हंता वायरस और यह कैसे करता है हमला?

यह वायरस मुख्य रूप से चूहों और गिलहरी जैसे कुतरने वाले जानवरों से तेजी से फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इसकी बीस से ज्यादा खतरनाक प्रजातियां मौजूद हैं।

  • हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम: शुरुआत बुखार और थकान से होती है, फिर फेफड़ों पर असर होता है।
  • हेमोरेजिक फीवर: यह सीधे किडनी पर प्रहार करता है।

इससे ब्लड प्रेशर बहुत कम हो जाता है और इंटरनल ब्लीडिंग का भारी खतरा हमेशा रहता है।

जानें तेजी से कैसे फैलता है यह जानलेवा संक्रमण

हंता वायरस का संक्रमण चूहों के मल, मूत्र या लार के सीधे संपर्क में आने से इंसान में होता है। जब इनके सूखने के बाद बारीक कण हवा में घुल जाते हैं, तो सांस के जरिए इंसान संक्रमित हो जाता है। संक्रमित सतह को छूकर चेहरे पर हाथ लगाने से भी यह वायरस शरीर में प्रवेश करता है। इसके अलावा किसी संक्रमित चूहे के काटने या पीड़ित व्यक्ति के करीब रहने से भी संक्रमण तेजी से फैलता है।

मौत का आंकड़ा बढ़ा, बचाव के लिए करें ये अहम उपाय

अब तक इस खतरनाक वायरस के आठ संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से पांच मरीजों की पुष्टि हो गई है और तीन लोगों की दुखद मौत हो चुकी है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि इसका कोई पक्का इलाज या टीका नहीं है। अस्पताल में शुरुआती पहचान और सही देखभाल से ही मरीजों की जान बच सकती है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी नागरिकों को साफ-सफाई रखने और चूहों से दूर रहने की सख्त सलाह दी है।

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