एम्स के डॉक्टरों का कमाल: पेट के बाहर आंतों के साथ जन्मा बच्चा, मौत के मुंह से खींच लाई टीम

Uttar Pradesh News: एम्स के चिकित्सकों ने गैस्ट्रोस्कीसिस जैसी अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा बीमारी से जूझ रहे एक नवजात को नया जीवन प्रदान किया है। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले का यह शिशु जन्म के समय अपनी आंतों और अन्य आंतरिक अंगों के साथ शरीर से बाहर पैदा हुआ था। समय पर उचित चिकित्सा न मिलने के कारण बच्चे की स्थिति बहुत गंभीर हो गई थी, लेकिन एम्स की विशेषज्ञ टीम ने जटिल सर्जरी के माध्यम से इस चुनौतीपूर्ण मामले को सफलतापूर्वक सुलझा लिया है।

दुर्लभ जन्मजात बीमारी गैस्ट्रोस्कीसिस और शुरुआती चुनौतियां

देवरिया के लार रोड निवासी एक दंपती को गर्भावस्था के दौरान ही अल्ट्रासाउंड जांच से इस विकृति का पता चल गया था। शिशु का जन्म 33 सप्ताह की प्री-मैच्योर अवस्था में हुआ और उसका वजन केवल दो किलोग्राम था। जन्म के वक्त बच्चे की छोटी व बड़ी आंत, पेट, इलियोसीकल जंक्शन और अपेंडिक्स शरीर के बाहर लटक रहे थे। प्रसूति विभाग की डॉ. शिखा सेठ के नेतृत्व में पहले सुरक्षित प्रसव कराया गया, जिसके तुरंत बाद पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की टीम ने मोर्चा संभाल लिया।

संकट के बीच एम्स की टीम का साहसिक निर्णय

बच्चे की हालत बिगड़ने पर डॉ. श्रेयस के और डॉ. आदित्य ने संक्रमण रोकने के लिए साइलो बैग का इस्तेमाल किया। हालांकि, अस्पताल में वेंटिलेटर युक्त बेड खाली न होने के कारण परिजनों को काफी संघर्ष करना पड़ा। अन्य अस्पतालों में भी भर्ती न मिल पाने के बाद अगले दिन एम्स में बेड उपलब्ध हुआ। तब तक नवजात सेप्टिक शाक, सांस के संकट, शरीर के तापमान में गिरावट और लवण असंतुलन जैसी घातक समस्याओं की चपेट में आ चुका था, जिससे स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी।

जटिल सर्जरी के माध्यम से अंगों का सफल प्रतिस्थापन

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों ने आईसीयू के भीतर ही ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। डॉ. श्रेयस ने डॉ. ऐश्वर्या के सहयोग से सफल सर्जरी कर सभी अंगों को पेट के भीतर सुरक्षित रूप से स्थापित कर दिया। इस पूरी प्रक्रिया में एनेस्थीसिया टीम की डॉ. अंकिता काबी और नियोनेटोलाजी की डॉ. आंचला भारद्वाज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभागाध्यक्ष डॉ. महिमा मित्तल के मार्गदर्शन में रेजिडेंट डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने भी चौबीसों घंटे निगरानी कर बच्चे को नई जिंदगी दी।

नवजात शिशुओं में इस बीमारी के गंभीर लक्षण

  • शिशु का पेट के बाहर आंतों, आमाशय या लीवर जैसे अंगों के साथ जन्म लेना।
  • त्वचा की कमी के कारण अंगों का सीधे बाहरी वातावरण के संपर्क में आना।
  • जन्म के तुरंत बाद शरीर में पानी की भारी कमी (डिहाइड्रेशन) होना।
  • खुले अंगों के कारण संक्रमण और सेप्सिस का अत्यधिक उच्च जोखिम रहना।
  • शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में असमर्थता और गंभीर सांस की तकलीफ।
  • आंतों में सूजन और उनके सामान्य कामकाज में रुकावट आने की संभावना।

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