India News: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया है। शनिवार को डीआरडीओ ने ‘स्क्रैमजेट कांबस्टर’ का 1,200 सेकंड (20 मिनट) तक चलने वाला सफल परीक्षण किया। हैदराबाद की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) में आयोजित यह परीक्षण भारत को स्वदेशी हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने के बेहद करीब ले आया है। यह उपलब्धि भविष्य के युद्धों में भारत की रणनीतिक स्थिति को काफी मजबूत करेगी।
दुनिया के चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हुआ भारत
इस सफल परीक्षण के साथ ही भारत अब अमेरिका, रूस और चीन जैसे उन शक्तिशाली देशों की सूची में शामिल होने की राह पर है, जिनके पास हाइपरसोनिक क्षमता मौजूद है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक तकनीकी सफलता नहीं है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की सैन्य ताकत का बड़ा प्रदर्शन है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए डीआरडीओ के वैज्ञानिकों, संबंधित उद्योगों और अकादमिक संस्थानों की टीम को हार्दिक बधाई दी है।
बेहद घातक और अचूक है स्क्रैमजेट तकनीक
हाइपरसोनिक मिसाइलें आवाज की गति से पांच गुना या उससे अधिक रफ्तार (मैक 5+) से उड़ान भरने में सक्षम होती हैं। स्क्रैमजेट इंजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह वायुमंडल से ही ऑक्सीजन प्राप्त करता है। इससे मिसाइल को भारी ऑक्सीजन टैंक ले जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे वह हल्की और अधिक तेज हो जाती है। इतनी तीव्र गति और हवा में दिशा बदलने की क्षमता के कारण इसे दुनिया के किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा रोकना लगभग असंभव है।
एक्टिव कूलिंग तकनीक से मिली बड़ी कामयाबी
अत्यधिक गति पर उड़ान भरते समय घर्षण के कारण मिसाइल और उसका इंजन बहुत ज्यादा गर्म हो जाते हैं। इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए डीआरडीओ ने “एक्टिव कूलिंग” प्रणाली का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। यह तकनीक इंजन को अत्यधिक ऊंचे तापमान पर भी सुरक्षित रखती है और उसे लंबी अवधि तक चालू रहने में मदद करती है। 1,200 सेकंड के इस परीक्षण ने भारत की तकनीकी परिपक्वता को साबित कर दिया है, जिससे भविष्य में मिसाइल निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

