Odisha News: भारत ने अपनी रणनीतिक ताकत का लोहा मनवाते हुए आधुनिक ‘एडवांस अग्नि’ मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। डीआरडीओ और स्ट्रेटेजिक फोर्स कमांड ने ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से इस घातक मिसाइल को लॉन्च किया। इस परीक्षण की सबसे बड़ी सफलता इसकी एमआईआरवी (MIRV) तकनीक रही। यह तकनीक भारत को एक ही मिसाइल के जरिए अलग-अलग ठिकानों पर सटीक हमला करने की क्षमता प्रदान करती है। अब भारतीय सेना एक ही वार में दुश्मन के कई ठिकानों को नेस्तनाबूद कर सकती है।
क्या है एमआईआरवी तकनीक और क्यों है यह घातक?
एमआईआरवी यानी मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेड री-एंट्री व्हीकल एक अत्याधुनिक सैन्य तकनीक है। इसमें एक ही मिसाइल के ऊपर कई वॉरहेड (हथियार) लगे होते हैं। सरल शब्दों में कहें तो यह एक ही तीर से कई शिकार करने जैसा है। अंतरिक्ष से वापस लौटते समय ये पेलोड अलग हो जाते हैं और विभिन्न लक्ष्यों को निशाना बनाते हैं। हाल के युद्धों में इस तकनीक ने भारी तबाही मचाई है। दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इतने सारे वॉरहेड्स को एक साथ ट्रैक करना नामुमकिन होता है।
हजारों किलोमीटर दूर दुश्मन का काल बनेगी यह मिसाइल
डीआरडीओ ने आधिकारिक तौर पर नाम उजागर नहीं किया है, लेकिन विशेषज्ञ इसे अग्नि-5 सीरीज का एडवांस वर्जन मान रहे हैं। यह मिसाइल इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) की श्रेणी में आती है। आईसीबीएम ऐसी मिसाइलें होती हैं जो 5500 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर सकती हैं। इसमें आधुनिक नेविगेशन सिस्टम और हाई प्रिसिजन गाइडेंस तकनीक का उपयोग किया गया है। यह तकनीक भारत की प्रतिरोधक क्षमता को वैश्विक स्तर पर कई गुना बढ़ा देती है।
मैक 24 की रफ्तार: एयर डिफेंस सिस्टम भी होंगे फेल
इस एडवांस मिसाइल की गति किसी को भी हैरान कर सकती है। री-एंट्री के दौरान इसकी रफ्तार मैक 24 तक पहुंच जाती है। यानी यह आवाज की गति से लगभग 24 गुना ज्यादा तेज है। करीब 29,400 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार होने के कारण रडार इसे पकड़ नहीं पाते। इतनी खतरनाक स्पीड के सामने दुनिया का कोई भी डिफेंस नेटवर्क बेअसर साबित हो सकता है। यह मिसाइल अंतरिक्ष से वापस वायुमंडल में प्रवेश करते समय हजारों डिग्री तापमान को भी आसानी से झेल लेती है।
दुश्मन के मिसाइल डिफेंस नेटवर्क को चकमा देने की क्षमता
एमआईआरवी सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह दुश्मन के रडार को कन्फ्यूज कर देता है। एक मिसाइल से निकलने वाले कई वॉरहेड के साथ अक्सर ‘नकली टारगेट’ भी छोड़े जाते हैं। इससे डिफेंस सिस्टम के लिए असली वॉरहेड की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। रडार समझ नहीं पाता कि किस पर हमला किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा करती है जिनके पास आधुनिक रक्षा ढाल है।
ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी पर कड़ा संदेश
यह परीक्षण ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक साल पूरे होने के अवसर पर किया गया है। रणनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह पाकिस्तान और उसके समर्थक देशों के लिए सीधा संदेश है। भारत अब लंबी दूरी तक हमला करने के साथ-साथ बड़े इलाके को एक साथ निशाना बनाने में सक्षम है। यह परीक्षण भारत की एडवांस रॉकेट तकनीक और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की पकड़ और भी मजबूत होगी।

