Himachal News: हिमाचल प्रदेश में शहरी निकाय निर्वाचन-2026 की तैयारियां अब अपने चरम पर हैं। सोलन जिले में चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ई.वी.एम.) के हस्तांतरण का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त मनमोहन शर्मा की उपस्थिति में मशीनों को विभिन्न निकायों के लिए रवाना किया गया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध रहे और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने पूरी प्रक्रिया की निगरानी की।
निर्धारित मानकों पर खरी उतरीं वोटिंग मशीनें
अतिरिक्त उपायुक्त सोलन राहुल जैन ने बताया कि स्थानांतरण से पूर्व सभी ई.वी.एम. की प्रथम स्तरीय जांच (FLC) पूरी कर ली गई थी। विशेषज्ञों ने निर्धारित मानकों के अनुसार मशीनों की कार्यप्रणाली को बारीकी से परखा। राज्य निर्वाचन आयोग के सख्त निर्देशों का पालन करते हुए ही इन मशीनों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है ताकि मतदाताओं का लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा कायम रहे।
निकायों के अनुसार EVM का वितरण विवरण
प्रशासन ने चुनाव की संवेदनशीलता को देखते हुए निकायों को मशीनों का आवंटन किया है। इसके तहत सोलन नगर निगम के लिए सर्वाधिक 73 मशीनें आवंटित की गई हैं। कण्डाघाट के लिए 20 और औद्योगिक शहर नालागढ़ के लिए 19 ई.वी.एम. भेजी गई हैं। इसके अतिरिक्त परवाणू निकाय के लिए 18 और अर्की के लिए 16 मशीनों की खेप रवाना की गई है। मतदान केंद्रों पर किसी भी तकनीकी समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त संख्या में मशीनें उपलब्ध हैं।
प्रशिक्षण और बैकअप के लिए विशेष प्रबंध
निकाय चुनाव में मतदान कर्मियों को निपुण बनाने के लिए प्रशिक्षण ई.वी.एम. भी साथ भेजी गई हैं। राहुल जैन ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन विभाग की टीमें इन मशीनों के संचालन का कड़ा अभ्यास करेंगी। आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि मतदान के दिन किसी भी प्रकार की देरी या तकनीकी बाधा न आए। पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है।
राजनीतिक दलों की मौजूदगी में पारदर्शी प्रक्रिया
ई.वी.एम. हस्तांतरण के समय कांग्रेस, भाजपा और बसपा के प्रमुख नेता मौजूद रहे। इनमें कांग्रेस की ओर से शिव दत्त शर्मा और भाजपा की ओर से चंद्रकांत जैसे प्रतिनिधि शामिल थे। उपायुक्त कार्यालय की अधीक्षक कमला शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने सुरक्षा प्रोटोकॉल की स्वयं निगरानी की। राजनीतिक दलों की उपस्थिति यह प्रमाणित करती है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है।

