अदाणी का जेपी एसोसिएट्स अधिग्रहण: बैंकों को सहना होगा ₹40,822 करोड़ का ‘हेयरकट’

Business News: जयप्रकाश गौड़ की प्रमुख कंपनी जेपी एसोसिएट्स (Jaiprakash Associates) अब गौतम अदाणी के नेतृत्व वाले अदाणी समूह का हिस्सा बनने जा रही है। दिवालिया प्रक्रिया (Insolvency Process) के तहत अदाणी समूह ने 14,535 करोड़ रुपये की सफल बोली लगाकर इस कंपनी का अधिग्रहण किया है। हालांकि, यह बोली कंपनी पर मौजूद कुल कर्ज के मुकाबले बेहद कम है। जेपी एसोसिएट्स पर कर्ज का बोझ इतना अधिक है कि अदाणी की बोली उसकी 50 फीसदी भरपाई करने में भी असमर्थ है।

बैंकों को होगा ₹40,822 करोड़ का भारी नुकसान

कंपनी द्वारा एक्सचेंज फाइलिंग में दी गई जानकारी के अनुसार, 30 अप्रैल 2026 तक जेपी एसोसिएट्स पर कुल 55,357 करोड़ रुपये का बकाया कर्ज था। अदाणी समूह की 14,535 करोड़ रुपये की बोली के बाद अब शेष 40,822 करोड़ रुपये का घाटा बैंकों और वित्तीय संस्थानों को उठाना होगा। वित्तीय जगत में इस नुकसान को ‘हेयरकट’ (Haircut) कहा जाता है। यह उन 19 बैंकों के लिए एक बड़ा झटका है, जिन्होंने कंपनी को भारी भरकम लोन दे रखा था।

क्या होता है बैंकिंग भाषा में ‘हेयरकट’?

इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत जब कोई कंपनी दिवालिया घोषित होती है, तो उसके लेनदारों (Lenders) को अपने बकाये का एक बड़ा हिस्सा छोड़ना पड़ता है। जेपी एसोसिएट्स के मामले में लेंडर्स को लगभग 75 फीसदी से अधिक का नुकसान सहना पड़ रहा है। यानी बैंकों को उनके द्वारा दिए गए प्रत्येक 100 रुपये के कर्ज के बदले केवल एक छोटा हिस्सा ही वापस मिल पाएगा। यह समझौता कंपनी को पूरी तरह बंद होने से बचाने और लिक्विडेशन से बेहतर रिकवरी के लिए किया जाता है।

वेदांता की ऊंची बोली के बावजूद क्यों चुने गए अदाणी?

जेपी एसोसिएट्स को खरीदने की दौड़ में अनिल अग्रवाल की वेदांता समूह ने 17,000 करोड़ रुपये की सबसे ऊंची बोली लगाई थी। इसके बावजूद लेंडर्स की कमेटी (CoC) ने अदाणी समूह के प्रस्ताव पर मुहर लगाई। इसका मुख्य कारण भुगतान की समय सीमा थी। जहां वेदांता इस राशि का भुगतान 5 साल की लंबी अवधि में करना चाहता था, वहीं अदाणी समूह ने इसे महज 2 साल में पूरा करने का प्लान पेश किया। बैंकों ने नकदी की तत्काल आवश्यकता को देखते हुए कम राशि के बावजूद अदाणी को प्राथमिकता दी।

कर्ज के जाल में कैसे फंसा जेपी ग्रुप?

एक समय में बुनियादी ढांचा क्षेत्र की दिग्गज रही जेपी एसोसिएट्स धीरे-धीरे भारी कर्ज के बोझ तले दब गई। रियल एस्टेट, सीमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अत्यधिक विस्तार और बाजार की मंदी ने कंपनी की वित्तीय स्थिति बिगाड़ दी। अदाणी समूह द्वारा इस अधिग्रहण के बाद अब जेपी ग्रुप की पैरेंट कंपनी का स्वामित्व बदल जाएगा। इस सौदे के पूरा होने से जहां कंपनी के प्रोजेक्ट्स को नई गति मिलने की उम्मीद है, वहीं बैंकिंग सेक्टर को इस बड़े वित्तीय बोझ की भरपाई अपने बैलेंस शीट से करनी होगी।

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